इंटरनेट के अग्रदूत डेविड जे. फार्बर का 91 वर्ष की आयु में निधन

इंटरनेट के अग्रदूत डेविड जे. फार्बर का 91 वर्ष की आयु में निधन

आधुनिक इंटरनेट की नींव रखने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में गिने जाने वाले डेविड जे. फार्बर का 7 फरवरी को टोक्यो में 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार के अनुसार, मृत्यु का कारण हृदय विफलता था। उन्हें अक्सर “इंटरनेट का दादा” कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने न केवल प्रारंभिक नेटवर्किंग अनुसंधान को दिशा दी, बल्कि उन छात्रों का मार्गदर्शन भी किया जिन्होंने आगे चलकर वैश्विक इंटरनेट संरचना का निर्माण किया। वर्ष 2018 से वे जापान के केइओ विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रहे थे।

बेल प्रयोगशालाओं में प्रारंभिक योगदान

फार्बर ने अपने करियर की शुरुआत 1950 के दशक के मध्य में बेल प्रयोगशालाओं से की। उस समय कंप्यूटर एक-दूसरे से अलग-थलग कार्य करते थे और डेटा आदान-प्रदान सीमित था। उन्होंने कंप्यूटिंग प्रणालियों को दूरसंचार नेटवर्क से जोड़ने के विचार पर काम किया, जो आगे चलकर नेटवर्क आधारित संचार का आधार बना।

उनका दृष्टिकोण उस समय क्रांतिकारी था, क्योंकि उन्होंने कंप्यूटर को केवल गणना करने वाली मशीन के रूप में नहीं, बल्कि संवाद और सूचना साझा करने के माध्यम के रूप में देखा। यह अवधारणा आधुनिक इंटरनेट के विकास में निर्णायक सिद्ध हुई।

इंटरनेट प्रोटोकॉल और डीएनएस की नींव

शैक्षणिक क्षेत्र में आने के बाद फार्बर ने कई प्रतिभाशाली शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। 1970 के दशक की शुरुआत में उनके डॉक्टरेट छात्र जोनाथन पोस्टेल ने इंटरनेट प्रोटोकॉल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंटरनेट प्रोटोकॉल वह ढांचा है जो नेटवर्क के माध्यम से डेटा पैकेट्स के संचार को नियंत्रित करता है।

उनके एक अन्य छात्र पॉल मॉकापेट्रिस ने डोमेन नेम सिस्टम के निर्माण में योगदान दिया, जो वेबसाइटों को संख्यात्मक आईपी पते के बजाय सरल नामों के माध्यम से एक्सेस करने की सुविधा देता है। फार्बर ने अनुसंधान के साथ-साथ नीतिगत स्तर पर भी काम किया और प्रायोगिक कंप्यूटर नेटवर्क के लिए सरकारी समर्थन सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई।

डिजिटल संचार के भविष्य की दूरदृष्टि

1977 में फार्बर ने इंजीनियर पॉल बारन के साथ मिलकर एक शोध पत्र प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने अनुमान लगाया कि कंप्यूटर जटिल संचार कार्यों को संभालने में सक्षम हो रहे हैं। इस अध्ययन में ईमेल, संदेश सेवा और डिजिटल सहयोग उपकरणों के उदय की भविष्यवाणी की गई थी।

उन्होंने कंप्यूटर को मानव संचार और सहयोग के लिए डिज़ाइन की जाने वाली प्रणाली के रूप में परिभाषित किया। उनकी यह दूरदृष्टि आज के सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और क्लाउड आधारित सेवाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंटरनेट प्रोटोकॉल डेटा पैकेट्स के नेटवर्क के माध्यम से संचरण को नियंत्रित करता है।
  • डोमेन नेम सिस्टम वेबसाइट नामों को संख्यात्मक आईपी पते में परिवर्तित करता है।
  • बेल प्रयोगशालाएं दूरसंचार अनुसंधान के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान के लिए जानी जाती हैं।
  • केइओ विश्वविद्यालय जापान का एक प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालय है।

डेविड जे. फार्बर का जीवन अनुसंधान, शिक्षा और नीतिगत योगदान का अनूठा संगम था। उन्होंने कंप्यूटिंग और दूरसंचार के एकीकरण के माध्यम से आधुनिक इंटरनेट की आधारशिला मजबूत की। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए विशेषज्ञों ने डिजिटल युग की संरचना को आकार दिया। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के तकनीकी नवाचार और वैश्विक संचार तंत्र में सदैव जीवित रहेगी।

Originally written on February 16, 2026 and last modified on February 16, 2026.

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