आर.एम. नच्चम्माई बनीं भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली महिला प्रमुख

आर.एम. नच्चम्माई बनीं भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली महिला प्रमुख

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। आर.एम. नच्चम्माई भारत की पहली महिला बन गई हैं जिन्हें किसी कार्यरत परमाणु ऊर्जा संयंत्र के संचालन का नेतृत्व सौंपा गया है। उन्हें न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के तहत कर्नाटक स्थित कैगा जनरेटिंग स्टेशन की यूनिट 3 और 4 की चीफ सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किया गया है। उनका यह पद 15 मार्च 2026 से प्रभावी होगा। यह नियुक्ति भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में लैंगिक प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक नियुक्ति

चीफ सुपरिंटेंडेंट के रूप में आर.एम. नच्चम्माई कैगा परमाणु ऊर्जा संयंत्र के संचालन, रखरखाव और इंजीनियरिंग सहायता विभागों की निगरानी करेंगी। इस पद पर उन्हें रिएक्टर के संचालन, सुरक्षा प्रणालियों और संयंत्र के प्रदर्शन पर निरंतर नजर रखनी होगी।

यह जिम्मेदारी परमाणु ऊर्जा प्रणाली के सबसे तकनीकी और चुनौतीपूर्ण नेतृत्व पदों में से एक मानी जाती है। भारत अपनी स्वच्छ ऊर्जा नीति के तहत परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। देश का लक्ष्य वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को लगभग 100 गीगावाट तक पहुंचाने का है, जिसके लिए अनुभवी नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

तीन दशकों से अधिक का परमाणु अनुभव

आर.एम. नच्चम्माई को परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालन में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने 1990 में मद्रास विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और विश्वविद्यालय में उच्च स्थान हासिल किया।

वर्ष 1991 में उन्होंने न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में अपने करियर की शुरुआत की। इंजीनियर प्रशिक्षुओं के दूसरे बैच में उन्होंने शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित विक्रम साराभाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन तथा कैगा जनरेटिंग स्टेशन की यूनिट 1 और 2 में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और नेतृत्व भूमिकाएं निभाई हैं।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक

नच्चम्माई की नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आसपास होने के कारण विशेष प्रतीकात्मक महत्व रखती है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में लगभग 10,000 कर्मचारियों में से करीब 900 महिलाएं कार्यरत हैं।

ऐसे में उनका इस उच्च पद पर पहुंचना परमाणु और इंजीनियरिंग जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है। उनकी सफलता भविष्य में अधिक महिलाओं को विज्ञान, तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

कैगा परमाणु ऊर्जा स्टेशन का महत्व

कर्नाटक स्थित कैगा परमाणु ऊर्जा स्टेशन भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा केंद्रों में से एक है। यहां वर्तमान में 220 मेगावाट क्षमता वाले चार प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर संचालित हो रहे हैं, जिससे कुल स्थापित क्षमता लगभग 880 मेगावाट है।

इसके अतिरिक्त यूनिट 5 और 6 के विकास पर भी कार्य चल रहा है। इनके शुरू होने के बाद इस स्टेशन की कुल क्षमता लगभग 2,280 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में अनुभवी नेतृत्व संयंत्र की सुरक्षा, दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भारत के वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन करता है।
  • कैगा परमाणु ऊर्जा स्टेशन कर्नाटक में स्थित है और यहां प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर का उपयोग किया जाता है।
  • प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर में भारी जल का उपयोग शीतलक और न्यूट्रॉन मॉडरेटर दोनों के रूप में किया जाता है।
  • भारत ने वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को लगभग 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

आर.एम. नच्चम्माई की यह उपलब्धि न केवल भारतीय परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी नियुक्ति भारत के ऊर्जा भविष्य और लैंगिक समानता दोनों के लिए सकारात्मक संकेत देती है।

Originally written on March 8, 2026 and last modified on March 8, 2026.

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