आर्यन वर्श्नेय बने भारत के 92वें ग्रैंडमास्टर
भारत ने शतरंज की दुनिया में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 21 वर्षीय आर्यन वर्श्नेय ने ग्रैंडमास्टर (GM) का खिताब प्राप्त कर देश के 92वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह उपलब्धि उन्होंने अंड्रानिक मारगैर्यान मेमोरियल टूर्नामेंट (आर्मेनिया) में अपना अंतिम GM नॉर्म हासिल करके प्राप्त की, वह भी एक राउंड शेष रहते हुए। आर्यन की यात्रा इस मायने में विशिष्ट है कि उन्होंने न तो किसी पेशेवर कोच के साथ प्रशिक्षण लिया, और न ही महंगी अकादमियों में शिक्षा प्राप्त की — उनका सफर घर से शुरू हुआ और वहीं संवरता चला गया।
घर में गढ़ा गया ग्रैंडमास्टर
आर्यन का शतरंज प्रशिक्षण उनके पिता गौरव वर्श्नेय द्वारा किया गया, जो दिल्ली में भौतिकी के शिक्षक हैं। जब आर्यन मात्र पाँच वर्ष के थे, तब उनकी मां परिवार को छोड़कर चली गईं। इसके बाद गौरव ने न सिर्फ अपने बेटे को अकेले पाला, बल्कि अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल भी की।
शतरंज की गंभीर शिक्षा आर्यन ने सात वर्ष की उम्र से शुरू की, और करीब दो वर्षों तक उनके पिता ही कोच, विश्लेषक और प्रेरक की भूमिका निभाते रहे। उन्होंने खेल की जटिलताओं को पुस्तकों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक खेलों और गेम विश्लेषण के माध्यम से समझा।
अनुशासन और आत्म-अध्ययन से मिली सफलता
आर्यन ने दिसंबर 2014 में अपना पहला रेटेड टूर्नामेंट खेला और शुरुआती रेटिंग 1261 रही। मात्र चार वर्षों में उनकी रेटिंग 2300 के पार पहुंच गई। जुलाई 2018 में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय अंडर-13 चैम्पियनशिप जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने कभी भी कोई शतरंज की किताब नहीं पढ़ी, बल्कि ChessBase सॉफ्टवेयर और खेलों के बाद किए गए विश्लेषण को ही अपना मार्गदर्शक बनाया। साल 2024 में उन्हें इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब मिला, जिसे उन्होंने पूरी तरह ओपन टूर्नामेंट्स में खेलकर हासिल किया, बिना किसी यूरोपीय प्रशिक्षण के।
वित्तीय सीमाओं के बावजूद उपलब्धियां
गौरव वर्श्नेय परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जिससे विदेशी प्रशिक्षण के अवसर सीमित रहे। इसके बावजूद आर्यन ने एशिया और यूरोप के ओपन टूर्नामेंट्स में भाग लेकर अपने तीनों GM नॉर्म्स पूरे किए।
IM बनने के छह महीने के भीतर ही उन्होंने बांग्लादेश, ग्रीस और आर्मेनिया में तीन GM नॉर्म्स हासिल कर यह खिताब अपने नाम किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• आर्यन वर्श्नेय भारत के 92वें ग्रैंडमास्टर बने।
• ग्रैंडमास्टर बनने के लिए तीन GM नॉर्म और 2500 एलो रेटिंग आवश्यक होती है।
• ओपन टूर्नामेंट्स में आयु या श्रेणी की बाध्यता नहीं होती — सभी खिलाड़ी समान रूप से भाग ले सकते हैं।
• 2010 के बाद भारत में शतरंज को संस्थागत समर्थन तेजी से बढ़ा है।
विश्व मंच की ओर दृष्टि
अब जब आर्यन ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं, उनकी नजरें विश्व शतरंज चैंपियन बनने पर टिकी हैं। उनका लक्ष्य मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश डोम्माराजू के खिलाफ जीत दर्ज करना है, जिनके साथ वे पहले भी प्रतिस्पर्धी खेल खेल चुके हैं।
आर्यन की यह यात्रा बताती है कि समर्पण, अनुशासन और एकाग्र मार्गदर्शन से बिना पारंपरिक संसाधनों के भी विश्व स्तरीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। उनका सफर भारतीय युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है कि दृढ़ संकल्प और आत्मबल के साथ किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।