आरबीआई के प्रस्तावित कड़े नियम: आरईआईटी को बैंक ऋण पर नई शर्तें

आरबीआई के प्रस्तावित कड़े नियम: आरईआईटी को बैंक ऋण पर नई शर्तें

भारतीय रिजर्व बैंक ने रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट को बैंक ऋण देने के लिए कड़े मानदंड प्रस्तावित किए हैं। द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 के मसौदे के अनुसार बैंक केवल उन्हीं आरईआईटी को ऋण दे सकेंगे जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में पंजीकृत हों, मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हों तथा कम से कम तीन वर्ष का परिचालन रिकॉर्ड और सकारात्मक नकदी प्रवाह रखते हों। समान प्रकृति के मसौदा दिशा-निर्देश अवसंरचना निवेश ट्रस्ट के लिए भी जारी किए गए हैं।

इन कदमों का उद्देश्य वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए आरईआईटी और इनविट बाजार को सुदृढ़ बनाना है।

प्रस्तावित ढांचे के तहत किसी उधार लेने वाले आरईआईटी तथा उससे संबद्ध विशेष प्रयोजन वाहन या होल्डिंग कंपनियों को बैंकों की कुल ऋण सीमा, पिछले वित्त वर्ष की 31 मार्च तक की परिसंपत्ति मूल्य का अधिकतम 49 प्रतिशत होगी। बैंक अपने निदेशक मंडल की स्वीकृति से इससे कम सीमा भी निर्धारित कर सकते हैं।

चूंकि आरईआईटी ट्रस्ट संरचना में आय-सृजन करने वाली अचल संपत्तियों में निवेश करते हैं, इसलिए आरबीआई ने विवेकपूर्ण जोखिम मूल्यांकन पर जोर दिया है।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि आरईआईटी को दिया जाने वाला ऋण ‘बुलेट’ या ‘बैलूनिंग’ मूलधन भुगतान संरचना में नहीं होगा। बुलेट भुगतान का अर्थ है कि ऋण की मूल राशि परिपक्वता पर एकमुश्त चुकाई जाए। इस प्रतिबंध का उद्देश्य पुनर्वित्त जोखिम को कम करना और स्थिर किस्त भुगतान सुनिश्चित करना है।

बैंकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऋण राशि का उपयोग नियामकीय मानदंडों के अनुरूप ही हो। भूमि अधिग्रहण जैसे कार्यों के लिए वित्तपोषण की अनुमति नहीं होगी, भले ही वह किसी बड़े परियोजना का हिस्सा क्यों न हो।

यदि ऋण का उद्देश्य विशेष प्रयोजन वाहनों के मौजूदा सावधि ऋण का पुनर्वित्त करना है, तो वह केवल पूर्ण परियोजनाओं से संबंधित होना चाहिए, जिन्हें पूर्णता प्रमाणपत्र या अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुका हो। इससे निर्माण और क्रियान्वयन जोखिम को सीमित करने का प्रयास किया गया है।

चूंकि आरईआईटी ट्रस्ट संरचना में कार्य करते हैं, इसलिए बैंकों को सुरक्षा प्रवर्तन और वसूली संबंधी कानूनी प्रावधानों का विशेष ध्यान रखना होगा।

  • आरईआईटी और इनविट भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा विनियमित होते हैं।
  • आरईआईटी आय-सृजन करने वाली अचल संपत्तियों में विशेष प्रयोजन वाहनों के माध्यम से निवेश करते हैं।
  • प्रस्तावित नियमों के तहत बैंकों की कुल ऋण सीमा परिसंपत्ति मूल्य का अधिकतम 49 प्रतिशत होगी।
  • बुलेट भुगतान में मूलधन की अदायगी परिपक्वता पर एकमुश्त की जाती है।

आरबीआई ने विदेशी शाखाओं को उन देशों में गठित आरईआईटी को ऋण देने की अनुमति भी दी है, जहां प्रभावी दिवाला और दिवालियापन ढांचा मौजूद हो। ये प्रस्तावित दिशा-निर्देश ऋण विस्तार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास हैं, जिससे भारत में आरईआईटी और इनविट बाजार को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।

Originally written on February 14, 2026 and last modified on February 14, 2026.

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