आरबीआई का पेमेंट्स विज़न 2028: डिजिटल भुगतान में बड़ा बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ‘पेमेंट्स विज़न 2028’ पेश किया है, जो अगले तीन वर्षों में भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, तेज और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने का रोडमैप है। इस विज़न में 15 प्रमुख पहलें शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उपभोक्ता नियंत्रण बढ़ाना, धोखाधड़ी को कम करना, अंतरराष्ट्रीय भुगतान को आसान बनाना और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
डिजिटल भुगतान में ऑन/ऑफ सुविधा
आई का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव डिजिटल भुगतान के लिए “स्विच ऑन/ऑफ” सुविधा का विस्तार करना है। यह सुविधा अभी केवल कार्ड लेनदेन के लिए उपलब्ध है, लेकिन अब इसे सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों तक बढ़ाया जाएगा। इसके जरिए उपयोगकर्ता खुद तय कर सकेंगे कि उनके खाते से किस प्रकार के लेनदेन—जैसे घरेलू या अंतरराष्ट्रीय—की अनुमति दी जाए। इससे उपभोक्ता का नियंत्रण बढ़ेगा और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)
रबीआई “पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस” (PaSS) शुरू करने की योजना बना रहा है। यह एक केंद्रीकृत प्रणाली होगी, जो ग्राहकों को बैंक बदलने या विलय की स्थिति में अपने भुगतान निर्देशों को आसानी से स्थानांतरित करने में मदद करेगी। इस सेवा से उपयोगकर्ता अपने सभी लिंक्ड भुगतान स्रोतों को एक जगह देख सकेंगे और जरूरत के अनुसार उन्हें पूर्ण या आंशिक रूप से ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे बैंकिंग प्रणाली में प्रतिस्पर्धा और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।
साझा जिम्मेदारी ढांचा और धोखाधड़ी नियंत्रण
डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए आरबीआई “साझा जिम्मेदारी ढांचा” (Shared Responsibility Framework) लागू करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में अनधिकृत लेनदेन की जिम्मेदारी केवल जारी करने वाले बैंक की होती है, लेकिन नए ढांचे में लाभार्थी बैंक भी जिम्मेदारी साझा करेगा। इससे दोनों पक्षों को बेहतर सुरक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरणा मिलेगी और धोखाधड़ी की घटनाओं पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा।
इलेक्ट्रॉनिक चेक और वित्तीय सुधार
आरबीआई पारंपरिक चेक प्रणाली को आधुनिक बनाकर इलेक्ट्रॉनिक चेक शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे सुरक्षा और दक्षता में सुधार होगा। इसके अलावा, TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) प्लेटफॉर्म्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में आसानी होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आरबीआई का पेमेंट्स विज़न 2028 डिजिटल भुगतान सुधार के लिए 15 प्रमुख पहलें शामिल करता है।
- स्विच ऑन/ऑफ सुविधा सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू की जाएगी।
- PaSS प्रणाली ग्राहकों को बैंक बदलते समय भुगतान निर्देशों को आसानी से स्थानांतरित करने में मदद करेगी।
- साझा जिम्मेदारी ढांचा अनधिकृत लेनदेन में दोनों बैंकों को जिम्मेदार बनाएगा।
यह विज़न दर्शाता है कि भारत तेजी से एक सुरक्षित और उन्नत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आरबीआई के ये कदम न केवल उपभोक्ताओं के भरोसे को मजबूत करेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक प्रतिस्पर्धी भी बनाएंगे।