आधार से जन्मतिथि प्रमाण पर रोक: यूपी और महाराष्ट्र ने जारी किए नए निर्देश
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों ने नए आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में अकेले इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। दोनों राज्यों के नियोजन और राजस्व विभागों ने यह निर्णय जन्म और पहचान संबंधी अभिलेखों में पारदर्शिता एवं शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया है।
उत्तर प्रदेश में नए सत्यापन नियम
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड में जन्म प्रमाण पत्र जैसी कोई अंतर्निहित जानकारी नहीं होती, इसलिए इसे जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि आधार को जन्मतिथि निर्धारण के दस्तावेज़ के रूप में प्रयोग न करें। सरकार का कहना है कि आधार केवल पहचान दस्तावेज़ है, जो बायोमेट्रिक जानकारी पर आधारित है, न कि जन्म से संबंधित सत्यापित अभिलेख।
महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई
महाराष्ट्र ने भी समान आदेश जारी करते हुए कहा है कि आधार के आधार पर विलंबित जन्म प्रमाण पत्र जारी करना अब मान्य नहीं होगा। 2023 के जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम के बाद आधार सत्यापन पर आधारित ऐसे प्रमाण पत्र निरस्त किए जाएंगे। राज्य सरकार ने उन अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है जिन्होंने केवल आधार के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किए थे, और जिला कलेक्टरों तथा सक्षम अधिकारियों के स्तर पर पुराने अनुमोदनों की समीक्षा का आदेश दिया है।
राष्ट्रीय सत्यापन और सुरक्षा उपायों की पृष्ठभूमि
ये बदलाव एक व्यापक प्रशासनिक और सुरक्षा अभियान के तहत किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक जिले में अस्थायी निरोध केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं और सीमा निगरानी को भी मजबूत किया गया है। इसी के साथ देशभर में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया जा रहा है, जिसकी अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और चुनावी उपयोग
जहाँ राज्यों ने नागरिक पंजीकरण के नियमों को सख्त किया है, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मामले में यह स्पष्ट किया कि आधार पहचान का एक वैध दस्तावेज़ है और मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इसे अन्य 11 स्वीकृत दस्तावेजों के साथ स्वीकार किया जा सकता है। चुनाव आयोग ने भी इस दिशा में निर्देश दिए हैं कि आधार को पहचान प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जन्मतिथि प्रमाण के रूप में नहीं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आधार कार्ड केवल पहचान स्थापित करता है, जन्मतिथि या जन्मस्थान नहीं।
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने प्रमाण पत्र जारी करने के नियम अद्यतन किए हैं।
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी।
- यूपी और महाराष्ट्र ने विलंबित जन्म प्रमाण पत्रों के लिए सख्त सत्यापन लागू किया है।
इन आदेशों से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकारें अब डिजिटल पहचान और जन्म प्रमाणन के बीच स्पष्ट भेद स्थापित करना चाहती हैं। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ-साथ नागरिक अभिलेखों की शुद्धता भी सुनिश्चित होगी।