आठ महीने की गर्भावस्था में मेघना सज्जनार ने एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

आठ महीने की गर्भावस्था में मेघना सज्जनार ने एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

भारत की निशानेबाजी टीम ने एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में एक प्रेरणादायक क्षण का अनुभव किया जब 32 वर्षीय मेघना सज्जनार ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि मेघना उस समय आठ महीने की गर्भवती थीं और शारीरिक व मानसिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अद्भुत संतुलन और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।

असाधारण परिस्थितियों में ऐतिहासिक प्रदर्शन

मेघना ने क्वालिफिकेशन में 628.6 अंक हासिल किए और फाइनल में 229.5 अंक लेकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह स्पर्धा तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण थी, जिसमें स्थिरता और सटीकता की आवश्यकता होती है। मेघना ने गर्भावस्था की कठिनाइयों के बावजूद अपने प्रदर्शन को नियंत्रित रखा और इस अनुभव को “शारीरिक रूप से थकाने वाला, लेकिन अनुशासन और तैयारी से संभालने योग्य” बताया।

प्रशिक्षण में बदलाव और तकनीकी अनुकूलन

गर्भावस्था के दौरान शरीर में संतुलन और मुद्रा में बदलाव आने के कारण मेघना को अपनी निशानेबाजी शैली पूरी तरह से पुनर्निर्मित करनी पड़ी। शरीर के गुरुत्वाकर्षण केंद्र में बदलाव आने से उन्हें अपनी जैकेट और ट्राउजर तक में बदलाव करने पड़े। उन्होंने प्रशिक्षण की तीव्रता घटाई और तकनीक व निरंतरता पर अधिक ध्यान दिया। रोज़ाना संतुलन से जुड़े अभ्यासों ने उन्हें स्थिरता बनाए रखने में मदद की।

गर्भावस्था के साथ प्रतिस्पर्धा का प्रबंधन

प्रतिस्पर्धा के दौरान स्थिर खड़े रहना कठिन हो गया था क्योंकि भ्रूण की गतिविधियाँ कभी-कभी लय को प्रभावित करती थीं, खासकर प्रारंभिक सीरीज में। उन्होंने 103.2 से शुरुआत की, लेकिन बाद की पांचों सीरीज में औसतन 105 अंक बनाए। उनके पूरे प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा के दौरान चिकित्सा निगरानी, फिजियोथेरेपी, और अनुमत दवाओं की सख्त निगरानी सुनिश्चित की गई ताकि सुरक्षा और डोपिंग नियमों का पालन हो सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • 10 मीटर एयर राइफल ओलंपिक निशानेबाजी स्पर्धा है, जो ISSF (International Shooting Sport Federation) के नियमों द्वारा संचालित होती है।
  • एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप प्रमुख योग्यता और रैंकिंग प्रतियोगिता मानी जाती है।
  • भारत एशिया में राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं में प्रमुख राष्ट्रों में शामिल है।
  • सभी एथलीटों को World Anti-Doping Agency के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

कोचिंग सहयोग और करियर की निरंतरता

मेघना बेंगलुरु में पूर्व अंतरराष्ट्रीय शूटर और कोच राकेश मानपत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं। कोच के अनुसार, उन्हें शारीरिक बदलावों के चलते शूटिंग की मूलभूत तकनीकें दोबारा सीखनी पड़ीं। पिछले वर्ष नींगबो वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीतने के बाद मेघना अपने प्रदर्शन की लय को बनाए रखना चाहती थीं। चिकित्सकीय परामर्श के बाद उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने का निर्णय लिया, जो उनके प्रसव से पहले का अंतिम आयोजन माना जा रहा है।

मेघना की यह उपलब्धि न केवल भारतीय निशानेबाजी के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह सभी महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी है कि समर्पण, अनुशासन और आत्मबल से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

Originally written on February 9, 2026 and last modified on February 9, 2026.

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