आकाशा300 3डी प्रिंटर: भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

आकाशा300 3डी प्रिंटर: भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

भारत ने तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए आकाशा300 नामक उन्नत 3डी प्रिंटर को सफलतापूर्वक तैनात किया है। इस हाई-टेम्परेचर मल्टी-मैटेरियल 3डी प्रिंटर को इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), वालियामाला में स्थापित किया गया है। यह कदम अंतरिक्ष और औद्योगिक अनुप्रयोगों में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आकाशा300 3डी प्रिंटर क्या है?

आकाशा300 एक उच्च-प्रदर्शन मल्टी-मैटेरियल एक्सट्रूजन आधारित 3डी प्रिंटर है, जिसे जटिल इंजीनियरिंग कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें ड्यूल-एक्सट्रूजन तकनीक का उपयोग किया गया है, जो 350°C तक तापमान पर कार्य कर सकती है, जिसे भविष्य में 500°C तक बढ़ाने की योजना है। इसकी मॉड्यूलर संरचना विभिन्न एक्सट्रूडर्स को जोड़ने की सुविधा देती है, जिससे हाइब्रिड एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग संभव हो पाती है।

उन्नत विशेषताएं और क्षमताएं

इस प्रिंटर में हीटेड बेड 110°C तक गर्म हो सकता है, जिसे 150°C तक बढ़ाया जा सकता है, जबकि इसका बंद चैंबर 80°C तक तापमान बनाए रखता है। ये विशेषताएं उच्च गुणवत्ता वाले और जटिल सामग्रियों के प्रिंटिंग के लिए आवश्यक स्थिर वातावरण प्रदान करती हैं। इसके अलावा, इसमें मजबूत मोशन सिस्टम और एयर फिल्ट्रेशन तकनीक भी शामिल है, जो इसे औद्योगिक स्तर के अनुसंधान और विकास के लिए उपयुक्त बनाती है।

अंतरिक्ष और औद्योगिक नवाचार में भूमिका

LPSC में इसकी तैनाती से प्रोपल्शन सिस्टम, सामग्री विज्ञान और त्वरित प्रोटोटाइपिंग के क्षेत्र में शोध को गति मिलेगी। 3डी प्रिंटिंग के माध्यम से ऐसे जटिल और हल्के घटकों का निर्माण संभव होता है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से बनाना कठिन होता है। यह विशेष रूप से अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां सटीकता, वजन में कमी और सामग्री की दक्षता अत्यंत आवश्यक होती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग को सामान्यतः 3डी प्रिंटिंग कहा जाता है।
  • लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) इसरो का प्रमुख केंद्र है।
  • उच्च तापमान 3डी प्रिंटिंग का उपयोग एयरोस्पेस उद्योग में होता है।
  • भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) नवाचार को बढ़ावा देता है।

सहयोग और नवाचार का उदाहरण

आकाशा300 के विकास में भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) के स्पेस टेक्नोलॉजी इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर और केरल स्टार्टअप मिशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह पहल दर्शाती है कि कैसे अकादमिक संस्थान, स्टार्टअप और सरकारी एजेंसियां मिलकर भारत की तकनीकी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं।

इस प्रकार, आकाशा300 न केवल भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर उन्नत निर्माण तकनीकों में देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाता है।

Originally written on March 27, 2026 and last modified on March 27, 2026.

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