आकांक्षी जिलों में पोषण और स्वास्थ्य सुधार के लिए नीति आयोग और यूनिसेफ की साझेदारी
भारत में मातृ एवं बाल पोषण की स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से नीति आयोग और यूनिसेफ इंडिया ने एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में स्वास्थ्य तथा पोषण सेवाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस साझेदारी का उद्देश्य देश के उन क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु पोषण परिणामों को बेहतर बनाना है जहां विकास के संकेतक राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं। सरकार का मानना है कि संस्थागत सहयोग और डेटा आधारित रणनीतियों के माध्यम से विकास संबंधी अंतर को कम किया जा सकता है।
आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों पर विशेष ध्यान
इस समझौते पर नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव और आकांक्षी जिलों एवं ब्लॉकों कार्यक्रम के मिशन निदेशक रोहित कुमार तथा यूनिसेफ इंडिया के उप प्रतिनिधि अर्जन डी वाग्ट ने हस्ताक्षर किए।
इस सहयोग का उद्देश्य जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। इसके तहत उन क्षेत्रों में विशेष रणनीतिक हस्तक्षेप किए जाएंगे जहां विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी है। इससे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
कार्यान्वयन प्रणाली को मजबूत बनाने का प्रयास
इस साझेदारी के माध्यम से विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। नीति आयोग का मानना है कि सरकारी एजेंसियों, विकास भागीदारों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित किए बिना पोषण संबंधी लक्ष्यों को तेजी से हासिल करना संभव नहीं है।
इसके साथ ही कार्यक्रम के तहत निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाएगा और डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में मदद मिलेगी।
यूनिसेफ और कॉर्पोरेट क्षेत्र की भूमिका
यूनिसेफ इंडिया इस पहल में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। इसके लिए उसके आईएमपीएक्ट फॉर न्यूट्रिशन मंच का उपयोग किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से निजी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्योग संगठनों को पोषण कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से निवेश जुटाकर समुदाय आधारित कार्यक्रमों को समर्थन देने और स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे सामाजिक विकास कार्यक्रमों में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी भी बढ़ेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी जिसका उद्देश्य पिछड़े जिलों के विकास को तेज करना है।
- इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- एकीकृत बाल विकास सेवा भारत सरकार की प्रमुख योजना है जो पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल देखभाल सेवाएँ प्रदान करती है।
- भारत में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रावधान कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत निर्धारित किए गए हैं।
इस सहयोग के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने और एकीकृत बाल विकास सेवाओं के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा। ज्ञान साझा करने के मंच विकसित कर सफल मॉडलों को अन्य आकांक्षी क्षेत्रों में लागू करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, जिससे सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को गति मिल सके।