आईएनएस सुनयना मिशन से हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक सक्रियता

आईएनएस सुनयना मिशन से हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक सक्रियता

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधानों के बीच भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना के अपतटीय गश्ती पोत आईएनएस सुनयना को मुंबई से ‘आईओएस सागर’ मिशन के तहत रवाना किया गया। यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मिशन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

यह तैनाती ऐसे समय में की गई है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों को प्रभावित कर रहा है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की उपस्थिति में इस मिशन को हरी झंडी दिखाई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना और क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग को मजबूत करना है।

समुद्री क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

वर्तमान समय में समुद्री प्रतिस्पर्धा केवल तेल और गैस संसाधनों तक सीमित नहीं रही है। अब यह दुर्लभ खनिजों, समुद्रतल संसाधनों, मत्स्य संपदा और डेटा अवसंरचना तक फैल चुकी है। इसके कारण समुद्री क्षेत्र वैश्विक राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। ऐसे में भारत सहित क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और समन्वय की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।

समुद्री सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियां

हिंद महासागर क्षेत्र में कई प्रकार की सुरक्षा चुनौतियां उभरकर सामने आ रही हैं। इनमें अवैध और अनियमित मछली पकड़ना, समुद्री डकैती, सशस्त्र लूट, नशीले पदार्थों की तस्करी और संदिग्ध गहरे समुद्र अनुसंधान शामिल हैं। हाल के वर्षों में समुद्री घटनाओं और मादक पदार्थों की जब्ती में वृद्धि ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को और उजागर किया है। यह स्पष्ट करता है कि समुद्री सुरक्षा अब बहुआयामी चुनौती बन चुकी है।

प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

आईओएस सागर मिशन की एक प्रमुख विशेषता इसमें 16 देशों के नौसैनिक कर्मियों की भागीदारी है। यह पोत कोलंबो, फुकेत, जकार्ता, सिंगापुर, चिटगांव, यांगून और माले जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों का दौरा करेगा और अंत में कोच्चि पहुंचेगा। इस दौरान समुद्री कौशल, नौवहन, संचार, अग्निशमन, क्षति नियंत्रण और वीबीएसएस जैसे अभियानों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे क्षेत्रीय देशों के बीच सामूहिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईएनएस सुनयना भारतीय नौसेना का एक अपतटीय गश्ती पोत है, जिसका उपयोग निगरानी और सुरक्षा अभियानों में किया जाता है।
  • ‘सागर’ का पूरा नाम “क्षेत्र में सबके लिए सुरक्षा और विकास” है, जो भारत की समुद्री नीति का प्रमुख सिद्धांत है।
  • हिंद महासागर विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ता है।
  • अवैध, अप्रतिवेदित और अनियमित मछली पकड़ना समुद्री पारिस्थितिकी और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।

आईएनएस सुनयना का यह मिशन भारत की समुद्री कूटनीति और सुरक्षा दृष्टिकोण को मजबूत बनाता है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह पहल न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत सहयोग आधारित सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहा है।

Originally written on April 4, 2026 and last modified on April 4, 2026.

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