आईएनएस दुनागिरी से भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा

आईएनएस दुनागिरी से भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा

भारतीय नौसेना को स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है, जब नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) के तहत पांचवें स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी को शामिल किया गया। यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन क्षमता और समुद्री शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईएनएस दुनागिरी का परिचय

आईएनएस दुनागिरी नीलगिरी-श्रेणी के उन्नत फ्रिगेट्स में से पांचवां जहाज है। इसे वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित किया गया है। यह जहाज पहले के लींडर-श्रेणी के आईएनएस दुनागिरी का आधुनिक रूप है, जो भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दे चुका है, जिससे परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय दिखाई देता है।

डिजाइन और प्रोपल्शन प्रणाली

इस युद्धपोत में कॉम्बाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जिसमें डीजल इंजन और गैस टर्बाइन दोनों का उपयोग होता है। इससे जहाज कम गति पर ईंधन दक्षता के साथ संचालन कर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर उच्च गति प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा, इसमें कंट्रोल योग्य पिच प्रोपेलर और उन्नत इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम भी शामिल है, जो संचालन को अधिक प्रभावी और स्वचालित बनाते हैं।

अत्याधुनिक हथियार प्रणाली

आईएनएस दुनागिरी अत्याधुनिक हथियारों से लैस है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, एमएफ-स्टार रडार और एमआरएसएएम वायु रक्षा प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा, जहाज में 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट, क्लोज-इन वेपन सिस्टम और पनडुब्बी रोधी हथियार जैसे रॉकेट और टॉरपीडो भी मौजूद हैं। ये सभी प्रणालियां इसे वायु, सतह और समुद्र के नीचे तीनों क्षेत्रों में प्रभावी युद्ध क्षमता प्रदान करती हैं।

रणनीतिक महत्व

आईएनएस दुनागिरी का शामिल होना भारतीय नौसेना की ब्लू-वॉटर क्षमता को मजबूत करता है। यह जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, निगरानी और रणनीतिक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और तकनीकी प्रगति का प्रतीक भी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रोजेक्ट 17ए के तहत उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट्स का निर्माण किया जा रहा है।
  • CODOG प्रोपल्शन सिस्टम में डीजल इंजन और गैस टर्बाइन दोनों का उपयोग होता है।
  • ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
  • MRSAM मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली रक्षा प्रणाली है।

अंततः, आईएनएस दुनागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कदम है। यह न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करता है।

Originally written on April 1, 2026 and last modified on April 1, 2026.

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