आईएनएस तरंगिनी और आईएनएस विक्रांत के साथ विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026

आईएनएस तरंगिनी और आईएनएस विक्रांत के साथ विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026

विशाखापत्तनम में 18 फरवरी से प्रारंभ हो रहे अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (आईएफआर) 2026 और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ में भारतीय नौसेना के कई प्रमुख पोत भाग ले रहे हैं। लगभग 75 नौसैनिक जहाजों की भागीदारी अपेक्षित है, जिनमें 20 विदेशी युद्धपोत शामिल हैं। यह आयोजन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती नौसैनिक कूटनीति और सामरिक उपस्थिति को रेखांकित करता है।

आईएनएस तरंगिनी का गौरवशाली इतिहास

INS Tarangini भारतीय नौसेना का प्रमुख सेल प्रशिक्षण पोत है, जिसे वर्ष 1997 में कमीशन किया गया था। वर्ष 2003–2004 में इसने विश्व परिक्रमा कर इतिहास रचा और ऐसा करने वाला यह पहला भारतीय नौसैनिक पोत बना।

दिसंबर 2010 में श्रीलंका नौसेना के हीरक जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भी तरंगिनी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस अवसर पर यह एकमात्र ‘टॉल शिप’ था और इसे श्रीलंका के राष्ट्रपति द्वारा समीक्षा किया गया था। भारतीय और श्रीलंकाई कैडेटों द्वारा संयुक्त रूप से डेक पर उपस्थिति ने समुद्री मैत्री और सहयोग का प्रतीक प्रस्तुत किया।

आईएफआर 2026 में आईएनएस विक्रांत का आकर्षण

INS Vikrant, भारत का स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत, आईएफआर 2026 का प्रमुख आकर्षण बनने जा रहा है। वर्तमान में तैनाती पर मौजूद यह पोत समीक्षा से पूर्व विशाखापत्तनम पहुंचने वाला है।

आईएनएस विक्रांत भारत की नौसैनिक आत्मनिर्भरता और ‘ब्लू-वॉटर’ क्षमता का प्रतीक है। यह देश में निर्मित पहला विमानवाहक पोत है, जो रक्षा निर्माण क्षेत्र में भारत की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा ऐसे मंच के रूप में कार्य करती है, जहां नौसैनिक शक्ति, परिचालन तत्परता और रक्षा उत्पादन क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाता है।

विदेशी नौसेनाओं की भागीदारी

आईएफआर और मिलन अभ्यास में कई मित्र देशों के पोत भी विशाखापत्तनम नौसैनिक अड्डे पर पहुंचे हैं। इनमें फिलीपींस नौसेना का फ्रिगेट बीआरपी मिगुएल मालवर, मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल का गश्ती पोत सीजीएस हुरावे तथा सेशेल्स तटरक्षक पोत एससीजीएस जोरोस्टर शामिल हैं।

दक्षिण-पूर्व एशिया से वियतनाम पीपुल्स नेवी का फ्रिगेट वीएनपीएस 17 भी भाग ले रहा है। इनकी उपस्थिति हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत में भारत के समुद्री सहयोग और साझेदारी को सुदृढ़ करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* ‘मिलन’ भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
* अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में राष्ट्राध्यक्ष द्वारा नौसैनिक जहाजों की औपचारिक समीक्षा की जाती है।
* आईएनएस विक्रांत भारत का पहला स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत है।
* विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसैनिक कमान का मुख्यालय है।

आईएफआर 2026 और मिलन का एक साथ आयोजन यह दर्शाता है कि भारत सहयोगात्मक सुरक्षा, अंतर-संचालन क्षमता और समुद्री साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है। 20 विदेशी नौसेनाओं की भागीदारी के साथ ये आयोजन हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करते हैं।

Originally written on February 18, 2026 and last modified on February 18, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *