आईएनएस अग्रय से तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता मजबूत

आईएनएस अग्रय से तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता मजबूत

भारतीय नौसेना को ‘अग्रय’ नामक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) की डिलीवरी के साथ समुद्री सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। यह स्वदेशी युद्धपोत निर्माण और तटीय रक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पोत विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।

अग्रय युद्धपोत का परिचय

अग्रय आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट की श्रृंखला में चौथा पोत है। इसका डिजाइन और निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा किया गया है। यह जहाज पूर्व के आईएनएस अग्रय की विरासत को आगे बढ़ाता है, जिसने 2017 तक भारतीय नौसेना में सेवा दी थी। यह परियोजना भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के मानकों के अनुरूप विकसित की गई है।

डिजाइन और प्रोपल्शन प्रणाली

अग्रय की सबसे खास विशेषता इसका वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा ऐसा युद्धपोत बनाता है जिसमें यह तकनीक उपयोग की गई है। यह प्रणाली उथले पानी में बेहतर संचालन क्षमता प्रदान करती है और जहाज की ध्वनि को कम करती है, जिससे यह दुश्मन पनडुब्बियों के लिए कम पहचान योग्य बनता है। यह पोत विशेष रूप से तटीय और लिटोरल क्षेत्रों में प्रभावी संचालन के लिए डिजाइन किया गया है।

आधुनिक हथियार और सेंसर

इस युद्धपोत में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली लगाई गई है, जिसमें हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें उन्नत शैलो वाटर सोनार सिस्टम भी मौजूद है, जो पानी के भीतर खतरों का सटीक पता लगाने में सक्षम है। यह पोत माइन डिटेक्शन और न्यूट्रलाइजेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रणनीतिक महत्व

अग्रय का शामिल होना भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी क्षमता और समुद्री निगरानी को मजबूत करता है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते समुद्री खतरों के बीच यह पोत देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ASW शैलो वाटर क्राफ्ट तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन के लिए बनाए जाते हैं।
  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) रक्षा मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख शिपयार्ड है।
  • वॉटरजेट प्रोपल्शन प्रणाली बेहतर गतिशीलता और कम ध्वनि हस्ताक्षर प्रदान करती है।
  • SONAR तकनीक का उपयोग पानी के भीतर वस्तुओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।

अंततः, ‘अग्रय’ का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करता है। यह न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी सशक्त बनाता है।

Originally written on April 1, 2026 and last modified on April 1, 2026.

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