आईआईटी मद्रास ग्लोबल से बहुराष्ट्रीय आईआईटी की दिशा में भारत का कदम

आईआईटी मद्रास ग्लोबल से बहुराष्ट्रीय आईआईटी की दिशा में भारत का कदम

भारत की उच्च शिक्षा और नवाचार क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आईआईटी मद्रास ग्लोबल की शुरुआत की गई है। इस महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय आउटरीच पहल का शुभारंभ केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया। इसका उद्देश्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास को दुनिया का पहला बहुराष्ट्रीय आईआईटी बनाना है, जिसके तहत विदेशों में परिसर, अनुसंधान केंद्र और स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किए जाएंगे।

आईआईटीएम ग्लोबल के पीछे की परिकल्पना

आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय फैकल्टी, उन्नत अवसंरचना और मजबूत उद्योग साझेदारियों पर आधारित आईआईटीएम ग्लोबल का लक्ष्य नवाचार और उद्यमिता को सामाजिक प्रभाव के साथ आगे बढ़ाना है। यह पहल अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग, स्टार्टअप सहभागिता और शैक्षणिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करेगी, जिससे भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता को वैश्विक चुनौतियों और अवसरों से जोड़ा जा सके।

विदेश नीति और वैश्विक शिक्षा का संबंध

उद्घाटन अवसर पर एस. जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब घरेलू संस्थानों की ताकत का उपयोग वैश्विक प्रभाव के लिए कर रही है। उन्होंने अफ्रीका में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के तंजानिया परिसर का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार भारतीय शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता साझेदार देशों में कौशल विकास, क्षमता निर्माण और तकनीकी उन्नति में योगदान दे रही है।

वैश्विक साझेदारियां और समझौते

आईआईटीएम ग्लोबल के अंतर्गत आईआईटी मद्रास ने कई अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ उच्च-प्रभाव वाले समझौता ज्ञापन किए हैं। इनमें अमेरिका में तीन, यूनाइटेड किंगडम में एक, जर्मनी में तीन, दुबई में तीन और सिंगापुर व मलेशिया सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तीन समझौते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ‘इंडिया फॉर ग्लोबल’ पहल के तहत छह एमओयू किए गए हैं। इन साझेदारियों का फोकस संयुक्त अनुसंधान, स्टार्टअप और उद्योग सहयोग, वैश्विक प्रतिभा आदान-प्रदान तथा डीप-टेक नवाचार को व्यावहारिक उपयोग में लाने पर है।

विस्तार योजना और रणनीतिक दृष्टिकोण

आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि के अनुसार, आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन चार स्तंभों पर आधारित रणनीति अपनाता है। इसमें आईआईटी मद्रास की तकनीकों का विदेशों में हस्तांतरण, वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु संयुक्त विकास परियोजनाएं, भारतीय स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना और विदेशी निवेश को घरेलू स्टार्टअप्स की ओर आकर्षित करना शामिल है। प्रारंभिक चरण में अमेरिका, दुबई, मलेशिया और जर्मनी सहित पांच स्थानों पर उपस्थिति स्थापित की जाएगी, जिसे आगे मांग और प्रदर्शन के आधार पर विस्तार दिया जाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईआईटीएम ग्लोबल का लक्ष्य आईआईटी मद्रास को दुनिया का पहला बहुराष्ट्रीय आईआईटी बनाना है।
  • इस पहल में विदेशी परिसर, अनुसंधान सहयोग और स्टार्टअप इकोसिस्टम शामिल हैं।
  • आईआईटी मद्रास ने अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्रों में कई एमओयू किए हैं।
  • यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक आउटरीच से जोड़ता है।

समग्र रूप से, आईआईटी मद्रास ग्लोबल भारत की ज्ञान कूटनीति का एक सशक्त उदाहरण है, जो शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से देश की वैश्विक उपस्थिति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।

Originally written on January 7, 2026 and last modified on January 7, 2026.

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