आईआईटी गुवाहाटी की नई खोज: पेट्रोल मिलावट की पहचान और तेल रिसाव की सफाई एक साथ

आईआईटी गुवाहाटी की नई खोज: पेट्रोल मिलावट की पहचान और तेल रिसाव की सफाई एक साथ

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अभिनव सामग्री विकसित की है जो पेट्रोल में केरोसिन की मिलावट का पता लगाने के साथ-साथ जल स्रोतों से तेल रिसाव को भी साफ कर सकती है। “फेज़-सेलेक्टिव ऑर्गेनोजेलटर” (Phase-Selective Organogelator – PSOG) नामक यह तकनीक ईंधन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करती है।

दोहरे उद्देश्य वाली अभिनव तकनीक

नव-विकसित PSOG सामग्री एक साथ दो कार्य करती है। पहला, यह पेट्रोल में केरोसिन जैसी मिलावट का पता लगाती है जो भारत के कई हिस्सों में ईंधन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली एक आम समस्या है। दूसरा, यह जल में तैरते तेल को अवशोषित कर उसे जेल में बदल देती है, जिससे उसे आसानी से हटा कर पानी की सतह को स्वच्छ बनाया जा सकता है। इस दोहरी कार्यप्रणाली के कारण यह ईंधन वितरण की गुणवत्ता जांच, औद्योगिक सुरक्षा, और समुद्री तेल रिसाव प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी है।

PSOG के पीछे का विज्ञान

यह शोध आईआईटी गुवाहाटी के रसायन विभाग में प्रोफेसर गोपाल दास के नेतृत्व में किया गया, जिसमें शोधकर्ता रुबी मोरल और ओइयाओ अप्पुन पेगू शामिल थे। PSOG को “हायरार्किकल सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली” नामक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया है। इस तकनीक में अणु स्वयं-संगठित होकर एक संरचना बनाते हैं, जैसे साबुन के अणु झाग बनाते हैं। यह सामग्री केवल विशेष तेलों जैसे केरोसिन या डीज़ल की उपस्थिति में जेल बनाती है, जिससे यह अत्यधिक चयनात्मक (selective) और सटीक परिणाम प्रदान करती है।

पर्यावरणीय और सुरक्षा महत्व

तेल रिसाव आज विश्व के सामने एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है, जो समुद्री जीवन को नष्ट करता है और तटीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करता है। Oil Tanker Spill Statistics 2024 के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग 10,000 टन तेल विश्व के समुद्री जल में फैला था। पारंपरिक सफाई विधियाँ न केवल महंगी होती हैं, बल्कि वे द्वितीयक प्रदूषण भी उत्पन्न करती हैं। इसके विपरीत, IIT गुवाहाटी की यह खोज रासायनिक रूप से सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती विकल्प प्रदान करती है। साथ ही, यह पेट्रोल स्टेशनों या घरेलू उपयोग में ईंधन की मिलावट का पता लगाने में भी सहायक होगी, जिससे दुर्घटनाओं और प्रदूषण के जोखिम को कम किया जा सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नई सामग्री का नाम Phase-Selective Organogelator (PSOG) है।
  • यह पेट्रोल में केरोसिन मिलावट का पता लगाने और पानी से तेल हटाने में सक्षम है।
  • शोध का नेतृत्व प्रोफेसर गोपाल दास ने IIT गुवाहाटी में किया।
  • PSOG की तकनीक हायरार्किकल सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली पर आधारित है।

भविष्य की दिशा और संभावनाएँ

IIT गुवाहाटी की टीम अब इस तकनीक को और विकसित कर अधिक प्रकार के ईंधन मिलावट की पहचान करने योग्य बनाने और विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है। उनका लक्ष्य है कि इसे पेट्रोल पंपों, तेल रिफाइनरियों और समुद्री सफाई अभियानों में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा सके। प्रोफेसर गोपाल दास के अनुसार, यह खोज न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है, यह दिखाते हुए कि आधुनिक रसायन विज्ञान कैसे वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान प्रदान कर सकता है।

Originally written on November 12, 2025 and last modified on November 12, 2025.

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