आईआईटी गुवाहाटी का नवाचार: हाइड्रोजन ईंधन और सौर जल शुद्धिकरण

आईआईटी गुवाहाटी का नवाचार: हाइड्रोजन ईंधन और सौर जल शुद्धिकरण

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक उन्नत सामग्री विकसित की है, जो जल के विद्युत अपघटन के माध्यम से हाइड्रोजन ईंधन उत्पादन के साथ-साथ सौर ऊर्जा आधारित समुद्री जल को पीने योग्य बनाने में सक्षम है। यह नवाचार स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षित पेयजल जैसी दो वैश्विक चुनौतियों का एक साथ समाधान प्रस्तुत करता है। प्रो. पी.के. गिरी के नेतृत्व में किए गए इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल “एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स” में प्रकाशित किया गया है।

हाइड्रोजन उत्पादन में बड़ी उपलब्धि

नई विकसित सामग्री ने हाइड्रोजन उत्पादन प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। हाइड्रोजन इवोल्यूशन रिएक्शन (HER) के लिए केवल 12 मिलीवोल्ट का अत्यंत कम ओवरपोटेंशियल आवश्यक है, जो पारंपरिक प्लैटिनम आधारित उत्प्रेरकों से भी बेहतर है। हाइड्रोजन एक स्वच्छ ईंधन है, जिसके उपयोग से केवल पानी उत्पन्न होता है, जिससे यह जीवाश्म ईंधनों का एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बनता है।

MXene आधारित तकनीकी नवाचार

यह शोध MXene नामक द्वि-आयामी पदार्थों पर आधारित है, जो उच्च विद्युत चालकता के लिए जाने जाते हैं। वैज्ञानिकों ने इनकी सीमित सक्रिय सतह क्षेत्र की समस्या को दूर करने के लिए इन्हें पतली रिबन जैसी संरचना में परिवर्तित किया। साथ ही, ऑक्सीजन की कमी वाले स्थानों पर रूथेनियम परमाणुओं को जोड़ा गया, जिससे उत्प्रेरक की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस संरचनात्मक बदलाव से चार्ज ट्रांसपोर्ट बेहतर हुआ और रासायनिक क्रियाशीलता में वृद्धि हुई।

सौर ऊर्जा आधारित जल विलवणीकरण

यह सामग्री केवल हाइड्रोजन उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सौर ऊर्जा का उपयोग कर समुद्री जल को पीने योग्य बनाने में भी सक्षम है। इसे त्रि-आयामी “जेनस इवैपोरेटर” में शामिल किया गया है, जो सूर्य की ऊर्जा का उपयोग कर पानी को वाष्पित करता है। इस प्रणाली ने लगभग 3.2 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर प्रति घंटे की दर से जल वाष्पीकरण प्राप्त किया और पांच दिनों तक बिना नमक जमाव के निरंतर कार्य किया। यह अंतरराष्ट्रीय पेयजल मानकों को पूरा करता है।

सतत विकास में महत्व

यह दोहरे कार्य वाली सामग्री स्वच्छ ऊर्जा और जल शुद्धिकरण के लिए एक किफायती और व्यावहारिक समाधान प्रदान करती है। इसकी उच्च दक्षता, स्थिरता और सौर ऊर्जा पर आधारित संचालन इसे वास्तविक जीवन में उपयोग के लिए उपयुक्त बनाते हैं। इसका उपयोग परिवहन, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली और विकेन्द्रीकृत जल उपचार में किया जा सकता है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग से केवल पानी उत्पन्न होता है, जिससे यह स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है।
  • MXene एक द्वि-आयामी पदार्थ है, जिसकी विद्युत चालकता बहुत अधिक होती है।
  • जल के विद्युत अपघटन के लिए न्यूनतम 1.23 वोल्ट ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • जेनस इवैपोरेटर सौर जल विलवणीकरण में ऊर्जा हानि को कम करता है।

अंततः, आईआईटी गुवाहाटी का यह नवाचार विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में ऊर्जा और जल संकट के समाधान में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है।

Originally written on March 18, 2026 and last modified on March 18, 2026.

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