आईआईटी इंदौर में तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘अभ्युदय–3’ का सफल समापन
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर में तृतीय तकनीकी हिंदी संगोष्ठी ‘तकनीकी हिंदी संगोष्ठी – अभ्युदय–3’ का समापन विज्ञान संचार और तकनीकी हिंदी के सशक्त उपयोग पर विशेष बल के साथ हुआ। दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में देशभर से वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और विज्ञान संप्रेषक एकत्र हुए, जिनका साझा उद्देश्य हिंदी भाषा के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के बीच सेतु को और मजबूत बनाना रहा।
संस्थागत सहयोग और आयोजन के उद्देश्य
इस संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर और सीएसआईआर–राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान द्वारा किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना तथा अनुसंधान और नवाचार के निष्कर्षों को गैर-अंग्रेज़ी भाषी समाज तक सुलभ बनाना रहा।
उद्घाटन सत्र और प्रमुख विचार
उद्घाटन सत्र के दौरान संगोष्ठी स्मारिका और अन्य शैक्षणिक प्रकाशनों का विमोचन किया गया। आईआईटी इंदौर के निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीकी हिंदी ज्ञान के लोकतंत्रीकरण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी विज्ञान संचार प्रयोगशालाओं और समाज के बीच की दूरी को कम करता है और अनुसंधान को आम जनजीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीएसआईआर–निस्प्र और विज्ञान संचार की भूमिका
सीएसआईआर–निस्प्र के मुख्य वैज्ञानिक सी. बी. सिंह ने भारत में तकनीकी हिंदी के विकास हेतु किए जा रहे निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यापक समाज तक पहुंचाने में भाषा और संचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिंदी में प्रकाशित लोकप्रिय विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ का विशेष उल्लेख किया, जो वर्ष 1952 से निरंतर प्रकाशित हो रही है और हिंदी में वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दे रही है।
शैक्षणिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क गतिविधियां
संगोष्ठी के दौरान विज्ञान, अभियांत्रिकी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े विषयों पर आमंत्रित व्याख्यान आयोजित किए गए। दो तकनीकी शोधपत्र प्रस्तुति सत्रों में 25 प्रतिभागियों ने हिंदी में अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री भेहरू सिंह चौहान द्वारा लोकगीत प्रस्तुति दी गई, जिसके बाद प्रसिद्ध लेखक और विज्ञान संप्रेषक संतोष चौबे की अध्यक्षता में विज्ञान कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। विज्ञान मेंटलिस्ट हरीश यादव के विज्ञान जादू कार्यक्रम ने श्रोताओं को आकर्षित किया। संगोष्ठी का समापन 6 जनवरी 2026 को आमंत्रित व्याख्यानों और समापन सत्र के साथ हुआ।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीएसआईआर–निस्प्र, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्थान है।
- ‘विज्ञान प्रगति’ भारत की सबसे पुरानी हिंदी लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं में से एक है।
- तकनीकी हिंदी का उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली का मानकीकरण करना है।
- आईआईटी संस्थान विज्ञान संचार और भाषा आधारित जनसंपर्क पहलों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देते हैं।
समग्र रूप से, ‘अभ्युदय–3’ संगोष्ठी ने यह स्पष्ट किया कि तकनीकी हिंदी और प्रभावी विज्ञान संचार के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान को समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे समावेशी और ज्ञान-आधारित विकास को नई दिशा मिलती है।