आईआईएससी का ब्रेन को-प्रोसेसर प्रोजेक्ट: एआई और न्यूरोटेक्नोलॉजी का नया कदम
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु ने मानव मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और खोई हुई क्षमताओं को बहाल करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी “मूनशॉट” परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत ऐसे ब्रेन को-प्रोसेसर विकसित किए जाएंगे जो न्यूरोमॉर्फिक हार्डवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिदम को एक साथ जोड़कर मस्तिष्क के संकेतों को समझ सकें और आवश्यक सुधारात्मक संकेत वापस भेज सकें। इस पहल को प्रतिक्षा ट्रस्ट का समर्थन प्राप्त है, जिसकी स्थापना इन्फोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन और सुधा गोपालकृष्णन ने की है। इस परियोजना को औपचारिक रूप देने के लिए आईआईएससी में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए।
एआई आधारित ब्रेन को-प्रोसेसर की अवधारणा
ब्रेन को-प्रोसेसर एक उभरती हुई न्यूरोटेक्नोलॉजी है, जिसका उद्देश्य मस्तिष्क की प्राकृतिक कार्यक्षमता को बढ़ाना या उसे पुनः स्थापित करना है। आईआईएससी की यह परियोजना ऐसे उपकरण विकसित करने पर केंद्रित है जो मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकें, उन्हें एआई एल्गोरिदम के माध्यम से समझ सकें और फिर आवश्यक प्रतिक्रिया संकेत मस्तिष्क तक पहुंचा सकें।
ये उपकरण प्रत्यारोपण योग्य और गैर-आक्रामक दोनों प्रकार के हो सकते हैं। इस प्रणाली को एक “क्लोज्ड-लूप” प्रणाली के रूप में डिजाइन किया जाएगा, जो लगातार मस्तिष्क के साथ संवाद करती रहेगी। मस्तिष्क के संकेतों का विश्लेषण करके यह तकनीक रोगियों को समन्वित गतिविधियों, जैसे हाथ बढ़ाने या वस्तु पकड़ने जैसी क्षमताओं को पुनः विकसित करने में मदद कर सकती है।
स्ट्रोक पुनर्वास पर विशेष ध्यान
इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों के पुनर्वास में सहायता करना है। विशेष रूप से मध्य सेरेब्रल धमनी से जुड़े स्ट्रोक के मामलों में मरीजों को गंभीर मोटर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
परियोजना के पहले चरण में शोधकर्ता एक गैर-आक्रामक न्यूरल को-प्रोसेसर विकसित करेंगे, जो सेंसरिमोटर फीडबैक के माध्यम से स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों को लक्ष्य आधारित गतिविधियां करने में सहायता करेगा। इसके साथ ही एक प्रत्यारोपण योग्य प्रणाली के विकास की आधारभूत तैयारी भी की जाएगी, जो सीधे मस्तिष्क के उन हिस्सों से जुड़ सकेगी जो गति और समन्वय को नियंत्रित करते हैं।
दूसरे चरण में न्यूनतम आक्रामक तकनीक पर आधारित एक एम्बेडेड को-प्रोसेसर विकसित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य लंबे समय से न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे लोगों में सेंसरिमोटर समन्वय को बहाल करना है।
स्वदेशी न्यूरोटेक्नोलॉजी विकास का लक्ष्य
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भारत में न्यूरोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करना भी है। शोधकर्ता प्रत्यारोपण हार्डवेयर, न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग सिस्टम और एआई सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का विकास देश में ही करने की योजना बना रहे हैं।
परियोजना के तहत भारत से संबंधित विशेष डेटा सेट भी तैयार किए जाएंगे, जिनमें स्टीरियो ईईजी और इलेक्ट्रोकोर्टिकोग्राफी रिकॉर्डिंग शामिल होंगी। इन डेटा सेटों का उपयोग उन्नत एआई मॉडल विकसित करने में किया जाएगा। इसके अलावा ओपन-सोर्स एआई उपकरण, डेटा सेट और विजुअलाइजेशन प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जाएंगे ताकि अन्य शोधकर्ता भी इस क्षेत्र में सहयोग कर सकें।
सहयोगात्मक अनुसंधान और चिकित्सीय परीक्षण
यह परियोजना आईआईएससी के “ब्रेन, कंप्यूटेशन और डेटा साइंस” कार्यक्रम पर आधारित है, जिसमें 20 से अधिक संकाय सदस्य विभिन्न विषयों में मिलकर काम कर रहे हैं। इस पहल में न्यूरोसाइंस, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, बायोइलेक्ट्रॉनिक्स और न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
आईआईएससी की टीम भारत और विदेशों के न्यूरोलॉजिस्ट, चिकित्सकों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर इस तकनीक का चिकित्सीय परीक्षण भी करेगी। विकास के दौरान मरीजों, देखभालकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों से प्राप्त प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाएगा ताकि यह तकनीक वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी रूप से उपयोग की जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रेन को-प्रोसेसर मूनशॉट परियोजना भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु द्वारा शुरू की गई है।
- इस पहल को प्रतिक्षा ट्रस्ट द्वारा वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है।
- न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली की नकल करके सूचना संसाधित करने वाली तकनीक है।
- इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य स्ट्रोक से प्रभावित लोगों में मस्तिष्क संकेतों को समझकर पुनर्वास में सहायता करना है।
आईआईएससी की यह पहल भारत में उन्नत न्यूरोटेक्नोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह स्ट्रोक और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।