आंध्र प्रदेश विधानसभा में एआई आधारित डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू
आंध्र प्रदेश विधानसभा ने सदस्यों की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की है। बजट सत्र की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष च. अय्यन्ना पात्रुडु ने इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार की घोषणा की। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब विधायकों की उपस्थिति डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी और पारंपरिक हस्ताक्षर रजिस्टर की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
नई प्रणाली के तहत उपस्थिति दर्ज करने के लिए एआई संचालित चेहरे की पहचान तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विधानसभा कक्ष के भीतर पैन-टिल्ट-ज़ूम कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो सदस्यों की पहचान कर उनकी उपस्थिति को रिकॉर्ड करेंगे।
उपस्थिति तभी दर्ज होगी जब विधायक अपने निर्धारित स्थान पर बैठेंगे। इसके अतिरिक्त, यह प्रणाली सदन में सदस्य के ठहराव की अवधि भी रिकॉर्ड करेगी। देर से आने या समय से पहले जाने की स्थिति स्वतः आधिकारिक रिकॉर्ड में परिलक्षित होगी। यह पहल विधानमंडल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस निर्णय के पीछे यह चिंता थी कि कुछ सदस्य बिना कार्यवाही में भाग लिए केवल हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अब केवल वास्तविक उपस्थिति ही दर्ज होगी, जिससे अनुशासन और प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित होगी।
डिजिटल निगरानी से कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा और विधायी कार्य की गंभीरता बनी रहेगी। इससे जनता के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व में लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में अनुपस्थिति के मुद्दे पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने ‘नो वर्क, नो पे’ नीति लागू करने का सुझाव दिया था तथा अत्यधिक मामलों में ‘राइट टू रिकॉल’ जैसे उपायों पर भी विचार करने की बात कही थी।
डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को सख्त जवाबदेही मानकों की दिशा में एक प्रारंभिक कदम माना जा रहा है। यह पहल विधायकों की जिम्मेदारी और कार्य निष्पादन को मापने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
- आंध्र प्रदेश विधानसभा ने वर्ष 2026 में एआई आधारित डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की।
- उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरे की पहचान तकनीक और पैन-टिल्ट-ज़ूम कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
- पारंपरिक हस्ताक्षर उपस्थिति रजिस्टर को समाप्त कर दिया गया है।
- 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन लखनऊ, उत्तर प्रदेश में आयोजित हुआ था।
यह सुधार डिजिटल शासन और संस्थागत पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। तकनीक के माध्यम से विधायी प्रक्रियाओं को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करेगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य राज्यों की विधानसभाएं भी इसे अपनाने पर विचार कर सकती हैं।