आंध्र प्रदेश में 16 गीगावॉट-घंटा क्षमता की देश की सबसे बड़ी बैटरी गीगाफैक्टरी स्थापित होगी

आंध्र प्रदेश में 16 गीगावॉट-घंटा क्षमता की देश की सबसे बड़ी बैटरी गीगाफैक्टरी स्थापित होगी

भारत की स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को बड़ा बल देते हुए वारी एनर्जीज ने आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले के रामबिल्ली में देश की सबसे बड़ी एकीकृत लिथियम-आयन बैटरी गीगाफैक्टरी स्थापित करने की घोषणा की है। 8,175 करोड़ रुपये के निवेश वाली यह हरित क्षेत्र (ग्रीनफील्ड) परियोजना 16 गीगावॉट-घंटा (GWh) उत्पादन क्षमता के साथ विकसित की जाएगी। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड से इसे सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है।

भारत की सबसे बड़ी एकीकृत बैटरी निर्माण इकाई

प्रस्तावित संयंत्र बैटरी मूल्य श्रृंखला के पूरे दायरे को समाहित करेगा—सेल निर्माण, बैटरी पैक असेंबली और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां (BESS) तक। 16 GWh क्षमता इसे भारत की सबसे बड़ी बैटरी निर्माण इकाई बनाएगी। परियोजना की एकीकृत प्रकृति घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाएगी और पूर्वी एशियाई बाजारों से आयातित बैटरी सेल और घटकों पर निर्भरता कम करेगी।

यह पहल आंध्र प्रदेश को उभरते ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। इससे राज्य में औद्योगिक अवसंरचना और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती

राज्य सरकार ने इस निवेश को स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में मील का पत्थर बताया है। आंध्र प्रदेश की एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति के तहत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, उपकरण निर्माण और ऊर्जा भंडारण समाधान को एकीकृत रूप से विकसित करने की रणनीति अपनाई गई है।

राज्य पहले ही सौर मॉड्यूल निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में उल्लेखनीय निवेश आकर्षित कर चुका है। नई बैटरी गीगाफैक्टरी उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीकों में ‘बैकवर्ड इंटीग्रेशन’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

ऊर्जा संक्रमण में रणनीतिक भूमिका

लिथियम-आयन बैटरियां इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर और पवन ऊर्जा भंडारण में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। जैसे-जैसे भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है और विद्युत गतिशीलता (ई-मोबिलिटी) को बढ़ावा दे रहा है, ऊर्जा भंडारण प्रणालियां ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

ऊर्जा भंडारण से सौर और पवन ऊर्जा की अनियमितता को संतुलित किया जा सकता है, जिससे निरंतर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति संभव होती है। यह परियोजना रोजगार सृजन और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी गति देगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लिथियम-आयन बैटरियां इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती हैं।
  • ‘गीगाफैक्टरी’ शब्द बड़े पैमाने पर GWh क्षमता वाली बैटरी निर्माण इकाई के लिए प्रयुक्त होता है।
  • बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण में सहायक होती है।
  • आंध्र प्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति लागू की है।

यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूत करेगी। स्वदेशी बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ने से आयात निर्भरता घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को नई गति मिलेगी। दीर्घकाल में यह पहल सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

Originally written on February 24, 2026 and last modified on February 24, 2026.

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