आंध्र प्रदेश में भारत की पहली ग्रीन अमोनिया परियोजना: स्वच्छ ऊर्जा निर्यात में नया युग
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक नया अध्याय शुरू कर दिया है। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में देश की पहली ग्रीन अमोनिया परियोजना की शुरुआत के साथ भारत अब ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया के निर्यातक देशों की सूची में शामिल होने को तैयार है। $10 बिलियन की भारी निवेश वाली यह परियोजना भारत के ऊर्जा संक्रमण का प्रतीक बनकर उभर रही है और आंध्र प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिला रही है।
काकीनाडा में परियोजना की शुरुआत
आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में AM Green द्वारा निर्मित ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया कॉम्प्लेक्स की पहली बड़ी उपकरण स्थापना मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में आरंभ हुई। यह परियोजना एक पुराने अमोनिया-यूरिया संयंत्र के ब्राउनफील्ड रूपांतरण द्वारा विकसित की जा रही है और इसे भारत में अब तक के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा निवेशों में से एक माना जा रहा है।
निवेश, उत्पादन क्षमता और रोजगार सृजन
AM Green परियोजना कुल $10 बिलियन निवेश से 1.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) ग्रीन अमोनिया उत्पादन के लिए डिज़ाइन की गई है, जो इसे वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी ऐसी सुविधा बनाता है। निर्माण चरण के दौरान लगभग 8,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है, जबकि दीर्घकालिक रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और पोर्ट सेवाओं में उच्च-कुशल नौकरियां मिलेंगी।
इस परियोजना से न केवल राज्य की औद्योगिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा, जिससे आंध्र प्रदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
चरणबद्ध संचालन और एकीकृत अवसंरचना
ग्रीन अमोनिया संयंत्र को तीन चरणों में चालू किया जाएगा — 0.5 MTPA क्षमता 2027 तक, 1.0 MTPA 2028 तक, और पूरी 1.5 MTPA क्षमता 2030 तक सक्रिय हो जाएगी। यह एकीकृत संयंत्र 7.5 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता, 1,950 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र, और 2 गीगावाट राउंड-द-क्लॉक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को शामिल करता है। साथ ही, इसमें भारत की पहली पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण परियोजना — पिन्नापुरम प्रोजेक्ट — को भी शामिल किया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की पहली ग्रीन अमोनिया परियोजना काकीनाडा, आंध्र प्रदेश में स्थापित की जा रही है।
- परियोजना की कुल उत्पादन क्षमता 1.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जो चरणबद्ध रूप से 2030 तक पूरी होगी।
- संयंत्र में सौर, पवन, इलेक्ट्रोलाइज़र और पंप्ड हाइड्रो भंडारण जैसी प्रौद्योगिकियाँ एकीकृत हैं।
- ग्रीन अमोनिया को ग्रीन हाइड्रोजन के एक प्रमुख वाहक के रूप में उपयोग किया जाता है और यह स्वच्छ ईंधन निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है।
वैश्विक निर्यात और रणनीतिक महत्व
AM Green ने Uniper जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते किए हैं और जापान तथा सिंगापुर के भागीदारों से भी जुड़ा हुआ है। काकीनाडा से उत्पादित ग्रीन अमोनिया का उपयोग स्वच्छ समुद्री ईंधन, बिजली उत्पादन और हाइड्रोजन मार्गों में किया जाएगा। इससे भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में एक उभरते हुए निर्यातक के रूप में सशक्त पहचान मिलेगी।
यह परियोजना भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्थायी विकास लक्ष्यों की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो आने वाले वर्षों में देश की भूमिका को वैश्विक ऊर्जा नेतृत्व में स्थापित कर सकती है।