आंध्र प्रदेश में बनेगा ‘ऊर्जा और साइबर रेज़िलिएंस केंद्र’
आंध्र प्रदेश सरकार ने विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है, जिसके तहत विशाखापट्टनम में ऊर्जा और साइबर रेज़िलिएंस केंद्र (Centre for Energy and Cyber Resilience) स्थापित किया जाएगा। यह पहल राज्य के बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण और साइबर खतरों से महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की गई है।
ग्रिड सुरक्षा पर केंद्रित पहल
यह प्रस्तावित केंद्र बिजली नेटवर्क को साइबर हमलों और परिचालन व्यवधानों से सुरक्षित रखने के लिए नीति निर्माण, जोखिम मूल्यांकन मॉडल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर कार्य करेगा। इसके माध्यम से बिजली वितरण कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों को उन्नत तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे राज्य की पावर ग्रिड प्रणाली अधिक मज़बूत और सुरक्षित बनेगी।
हरित ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बल
आंध्र प्रदेश ने 160 गीगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस साझेदारी से राज्य को अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त होगा, जिससे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली बिजली उत्पादन संभव होगा। साथ ही, संचरण हानि (Transmission Loss) को घटाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय योजनाओं के अंतर्गत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन भी तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा का प्रसार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों तक हो सके।
तकनीकी एकीकरण से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार
राज्य प्रशासन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकों का उपयोग बिजली प्रवाह के अनुकूलन और दक्षता बढ़ाने के लिए करना चाहता है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी उन्नयन न केवल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को संभालने में मदद करेगा बल्कि आपूर्ति की विश्वसनीयता और स्थिरता भी सुनिश्चित करेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केंद्र का मुख्य उद्देश्य बिजली ग्रिड की साइबर और परिचालन सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
- आंध्र प्रदेश का लक्ष्य 160 गीगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का है।
- संचरण हानि को घटाना राज्य की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
- यह साझेदारी 30वें सीआईआई पार्टनरशिप समिट, विशाखापट्टनम में घोषित की गई थी।
निवेश और रोजगार की नई संभावनाएँ
जिस सम्मेलन में यह समझौता हुआ, वहां राज्य को कुल ₹13 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग 30 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर 60 देशों के प्रतिनिधि, विदेशी मंत्री और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आंध्र प्रदेश ऊर्जा, उद्योग और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग का नया केंद्र बनता जा रहा है।