दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक 2025: भारत की ऋण समाधान प्रणाली को सशक्त बनाने की पहल

दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक 2025: भारत की ऋण समाधान प्रणाली को सशक्त बनाने की पहल

केंद्र सरकार ने संसद के आगामी बजट सत्र (मार्च 9 से आरंभ होने वाले दूसरे चरण) में दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करने की योजना बनाई है। इस विधेयक का उद्देश्य भारत की दिवाला प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, समयबद्ध और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है।

वित्त मंत्री का बयान और विधायी तैयारी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जो कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रही हैं, ने बजट 2026–27 प्रस्तुत करने के अगले दिन मीडिया से बातचीत में बताया कि संसदीय समिति ने संशोधनों पर अपनी रिपोर्ट दे दी है, और सरकार विधेयक पेश करने के लिए तैयार है।

प्रस्तावित संशोधनों के उद्देश्य

सरकार के अनुसार, इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य दिवाला प्रक्रियाओं को अधिक समयबद्ध और प्रभावशाली बनाना है। प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं:

  • दिवाला मामलों की तेज़ी से स्वीकृति
  • समाधान परिणामों में सुधार
  • ऋणदाताओं और निवेशकों के लिए पूर्वानुमेयता
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दिवाला ढांचे का संरेखण

इस विधेयक से भारत की आर्थिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

दिवाला संहिता की पृष्ठभूमि

इन्सॉल्वेन्सी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) वर्ष 2016 में लागू की गई थी। तब से इसमें अब तक छह बार संशोधन हो चुके हैं; अंतिम संशोधन 2021 में किया गया था। वर्ष 2025 में प्रस्तावित यह विधेयक सातवां संशोधन होगा।

IBC ने भारत में ऋणी–ऋणदाता संबंधों को मौलिक रूप से बदल दिया और डिफॉल्ट के मामलों में सख्त परिणामों की व्यवस्था की, जिससे कंपनियों और प्रवर्तकों पर एक मजबूत नियंत्रण प्रभाव पड़ा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) 2016 में अधिनियमित की गई थी।
  • अब तक 6 संशोधन हो चुके हैं; अंतिम संशोधन 2021 में हुआ था।
  • IBC का उद्देश्य है — दिवाला मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना।
  • IBC संशोधन विधेयक 2025 सातवाँ विधायी संशोधन होगा।

विधायी प्रक्रिया और आगामी समयरेखा

इस संशोधन विधेयक को 12 अगस्त 2025 को लोकसभा में पहली बार पेश किया गया था, जिसमें इनसॉल्वेंसी एप्लिकेशन की स्वीकृति अवधि को कम करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल थे। इसके बाद इसे लोकसभा की चयन समिति को भेजा गया, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।

सरकार अब समिति की सिफारिशों को सम्मिलित कर विधेयक को बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद में फिर से प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।

यह विधेयक भारत में ऋण समाधान की प्रक्रिया को अधिक सशक्त, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

Originally written on February 2, 2026 and last modified on February 2, 2026.

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