आंध्र प्रदेश में दुनिया का पहला स्वायत्त समुद्री जहाज निर्माण और सिस्टम केंद्र

आंध्र प्रदेश में दुनिया का पहला स्वायत्त समुद्री जहाज निर्माण और सिस्टम केंद्र

भारत ने समुद्री और रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आंध्र प्रदेश में दुनिया के पहले स्वायत्त समुद्री जहाज निर्माण और सिस्टम केंद्र की स्थापना की आधारशिला रखी है। यह केंद्र मुंबई स्थित सागर डिफेंस इंजीनियरिंग द्वारा नेल्लोर जिले के जुव्वलाडिने फिशिंग हार्बर में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना स्वदेशी समुद्री प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

आंध्र प्रदेश में रणनीतिक परियोजना

इस परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने जुव्वलाडिने फिशिंग हार्बर में लगभग 29.58 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस स्थान की विशेषता यह है कि यहां से सीधे समुद्र तक पहुंच संभव है, जिससे जहाजों का निर्माण, परीक्षण और तैनाती एक ही स्थान से की जा सकेगी। यह पहल राज्य सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है जिसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में उन्नत विनिर्माण ढांचा विकसित करना और भारत के समुद्री प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगी और समुद्री नवाचार को गति प्रदान करेगी।

स्वायत्त समुद्री प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित

यह नया केंद्र उन्नत स्वायत्त समुद्री प्रणालियों के विकास पर काम करेगा। इनमें मानव रहित सतही पोत, स्वायत्त जलमग्न वाहन, बुद्धिमान नेविगेशन प्रणाली, समुद्री सेंसर और सुरक्षित संचार नेटवर्क शामिल होंगे। इसके अलावा यहां ऐसे कमांड और नियंत्रण प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जाएंगे जिनके माध्यम से समुद्री प्रणालियां न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ संचालित हो सकें। इन तकनीकों से समुद्री क्षेत्रों में निगरानी, सुरक्षा और संचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

डिजिटल ट्विन और स्मार्ट विनिर्माण का उपयोग

इस केंद्र की प्रमुख तकनीकी विशेषता डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग होगा। इसके तहत जहाजों और शिपयार्ड अवसंरचना के वर्चुअल मॉडल तैयार किए जाएंगे, जिनके माध्यम से प्रदर्शन का परीक्षण, डिजाइन में सुधार और संचालन का सिमुलेशन किया जा सकेगा। इसके अलावा शिपयार्ड में स्मार्ट विनिर्माण तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा, जिनमें रोबोटिक निर्माण प्रणाली शामिल होंगी जो स्वचालित वेल्डिंग, कटिंग, पेंटिंग और असेंबली जैसे कार्यों को पूरा करेंगी। स्वचालित मार्गदर्शित वाहन सामग्री के परिवहन का कार्य करेंगे और 3डी प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से विशेष पुर्जों और स्पेयर पार्ट्स का तेज उत्पादन संभव होगा।

समुद्री सुरक्षा और स्मार्ट फिशिंग को बढ़ावा

यह परियोजना भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इसके माध्यम से देश में ही अगली पीढ़ी की मानव रहित समुद्री प्रणालियों का विकास किया जा सकेगा। इससे भारत को स्वायत्त समुद्री तकनीकों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने में भी मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त यह केंद्र स्मार्ट फिशिंग फ्लीट नेटवर्क के विकास में भी योगदान देगा, जिससे मछली पकड़ने वाली नौकाओं को उपग्रह और क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सकेगा। इससे मछली के संभावित स्थानों की जानकारी, मौसम चेतावनी, नौकाओं के बीच समन्वय और अवैध मछली पकड़ने की पहचान जैसे कार्य आसान हो सकेंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मानव रहित सतही पोत ऐसे जहाज होते हैं जो बिना चालक दल के समुद्र की सतह पर संचालित होते हैं।
  • स्वायत्त जलमग्न वाहन पानी के भीतर अन्वेषण और निगरानी के लिए उपयोग किए जाने वाले रोबोटिक उपकरण होते हैं।
  • डिजिटल ट्विन तकनीक किसी भौतिक प्रणाली का वर्चुअल मॉडल बनाकर उसके परीक्षण और विश्लेषण की सुविधा प्रदान करती है।
  • आंध्र प्रदेश तटीय औद्योगिक अवसंरचना को विकसित कर समुद्री और रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है।

यह परियोजना भारत के समुद्री और रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से उन्नत स्वायत्त समुद्री प्रणालियों के विकास को गति मिलेगी और देश की समुद्री सुरक्षा तथा औद्योगिक क्षमता दोनों को लाभ होगा।

Originally written on March 13, 2026 and last modified on March 13, 2026.

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