असम सरकार का उदासीन भकतः कल्याण योजना: सत्रीय परंपरा को सम्मान और संरक्षण

असम सरकार का उदासीन भकतः कल्याण योजना: सत्रीय परंपरा को सम्मान और संरक्षण

असम सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक सत्र प्रणाली से जुड़े उदासीन भकतः (निःसंतान संन्यासी भिक्षु) के लिए एक समर्पित कल्याण योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा द्वारा घोषित यह पहल असम की वैष्णव भक्ति परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के रक्षकों को सम्मानित करने और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

निःस्वार्थ सेवा को आर्थिक सहायता

इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक पात्र उदासीन भकत को प्रति माह ₹1,500 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, लगभग 620 भिक्षु, जो मान्यता प्राप्त सत्रों में स्थायी रूप से निवास करते हैं, इस योजना से लाभान्वित होंगे।
यह सहायता भिक्षुओं की मौलिक व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति और उनके लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रदान की जाएगी। पारंपरिक रूप से ये भिक्षु सामुदायिक दान और सत्र की सीमित व्यवस्थाओं पर निर्भर रहते हैं।

सत्र और असम की सांस्कृतिक विरासत

सत्र असम में एकशरण वैष्णव परंपरा के अंतर्गत स्थापित धार्मिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सुधार के केंद्र हैं। महान संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा आरंभ की गई यह प्रणाली आज भी असम की सांस्कृतिक पहचान, भक्ति संगीत, नृत्य, शिल्प और आध्यात्मिक अभ्यास का अभिन्न अंग बनी हुई है। सरकार ने इस योजना को इन भिक्षुओं की पीढ़ियों से चली आ रही आध्यात्मिक सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति एक औपचारिक सम्मान बताया है।

सरकार की सोच और व्यापक दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री शर्मा ने इस योजना को उन संतों को श्रद्धांजलि बताया है, जो अपना जीवन भक्ति, अनुशासन और सेवा में समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल उन ऐतिहासिक उपेक्षाओं की भरपाई का एक प्रयास है, जो इन संतों को वर्षों से झेलनी पड़ी।
उन्होंने इस घोषणा को असम की “जाति, माटी, भेटी” — पहचान, भूमि और मातृभूमि — की रक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से भी जोड़ा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सत्र असम की एकशरण वैष्णव परंपरा के अंतर्गत स्थापित वैष्णव मठ हैं।
  • उदासीन भकत वे संन्यासी भिक्षु हैं जो सत्रों में आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए निवास करते हैं।
  • इस योजना के तहत पात्र भिक्षुओं को ₹1,500 प्रति माह की सहायता दी जाएगी।
  • यह योजना मुख्यमंत्री कार्यालय के अंतर्गत असम सरकार द्वारा संचालित की जा रही है।

प्रतीकात्मक मान्यता: आर्थिक सहायता से परे

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल वित्तीय सहयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेवा की औपचारिक मान्यता है। यह पहल सत्रों की संस्थागत शक्ति को पुनः सुदृढ़ करने, समाज में उनकी प्रासंगिकता को बढ़ावा देने और भक्ति परंपरा के रक्षकों को गरिमा प्रदान करने का प्रयास है।

यह योजना केवल एक भत्ते की व्यवस्था नहीं, बल्कि असम की सभ्यतागत आत्मा को संरक्षित रखने वाले भिक्षुओं के प्रति समाज और शासन की संयुक्त श्रद्धांजलि है।

Originally written on January 3, 2026 and last modified on January 3, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *