असम राइफल्स में शामिल होंगी स्वदेशी कुत्तों की नस्लें

असम राइफल्स में शामिल होंगी स्वदेशी कुत्तों की नस्लें

आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सुरक्षा बलों में स्वदेशी संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में असम राइफल्स ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश का सबसे पुराना अर्द्धसैनिक बल अब अपनी डॉग स्क्वाड में भारतीय कुत्तों की नस्लों को शामिल करने जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत मणिपुर की तंगखुल हुई नस्ल को पायलट परियोजना के रूप में पहले ही शामिल किया जा चुका है, जबकि तमिलनाडु की कोम्बई नस्ल को अप्रैल से शामिल करने की योजना है। दोनों नस्लों को मार्च 2027 तक पूर्ण रूप से शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वदेशी नस्लों पर विशेष ध्यान

गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप सुरक्षा बलों में भारतीय नस्लों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, स्वदेशी कुत्ते स्थानीय जलवायु के अनुकूल होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक रखते हैं।

वर्ष 2022 में छह तंगखुल हुई कुत्तों को पायलट परियोजना के तहत शामिल किया गया था। वर्तमान में ये कुत्ते मादक पदार्थों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब कोम्बई नस्ल को भी शामिल किया जाएगा, जो अपनी फुर्ती और सुरक्षा प्रवृत्ति के लिए जानी जाती है। यह नस्ल परंपरागत रूप से पहरेदारी में दक्ष मानी जाती है।

प्रशिक्षण ढांचा और मौजूदा क्षमता

असम राइफल्स की अधिकृत डॉग स्क्वाड क्षमता 344 कुत्तों की है, जबकि वर्तमान में 253 कुत्ते पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर क्षेत्रों में तैनात हैं। इनके साथ 1,200 से अधिक प्रशिक्षित हैंडलर कार्यरत हैं।

जोरहाट स्थित असम राइफल्स डॉग ट्रेनिंग सेंटर में 104 कुत्ते और 174 हैंडलर विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यहां बुनियादी प्रशिक्षण, आज्ञाकारिता, ट्रैकिंग, विस्फोटक पहचान और मादक पदार्थों की पहचान जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। चयनित कर्मियों को विशेष केंद्रों पर उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके बाद वे प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं देते हैं।

संचालन में भूमिका और विस्तार की योजना

डॉग स्क्वाड ने आतंकवाद-रोधी और मादक पदार्थों के खिलाफ अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सितंबर 2025 में म्यांमार से जुड़े एक बड़े मादक पदार्थ जब्ती अभियान में कुत्ता दस्ते की भूमिका उल्लेखनीय रही।

भविष्य में इन कुत्तों की भूमिका को और विस्तृत करने की योजना है, जिसमें दोहरे उद्देश्य वाले आक्रमण कार्य, उन्नत विस्फोटक पहचान और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान खोज एवं बचाव कार्य शामिल हैं। स्वदेशी नस्लों की भागीदारी से इन अभियानों में और अधिक दक्षता आने की उम्मीद है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* असम राइफल्स भारत का सबसे पुराना अर्द्धसैनिक बल है और यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
* आत्मनिर्भर भारत अभियान का उद्देश्य रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है।
* तंगखुल हुई कुत्ते की एक स्वदेशी नस्ल है, जो मणिपुर से संबंधित है।
* कोम्बई तमिलनाडु की एक पारंपरिक भारतीय नस्ल है, जो पहरेदारी और सुरक्षा कौशल के लिए प्रसिद्ध है।

स्वदेशी कुत्तों की नस्लों को शामिल करने का यह निर्णय न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता को भी मजबूत करेगा। भारतीय जलवायु और भूगोल के अनुकूल नस्लों के उपयोग से असम राइफल्स अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वदेशी क्षमताओं को भी नई पहचान दे रहा है।

Originally written on February 13, 2026 and last modified on February 13, 2026.

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