असम में सीएए के तहत पहली नागरिकता: दीपाली दास को मिला कानूनी दर्जा
असम के कछार जिले की 60 वर्षीय दीपाली दास को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता मिलने के साथ ही राज्य में एक ऐतिहासिक उदाहरण स्थापित हुआ है। ढोलाई ब्लॉक के हवाइथांग क्षेत्र की निवासी दीपाली दास को 6 मार्च को नागरिकता प्रमाणपत्र दिया गया, जिससे उनके कई वर्षों से चल रहे कानूनी और प्रशासनिक विवाद का अंत हो गया। यह मामला असम में सीएए के व्यावहारिक क्रियान्वयन और लंबे समय से चल रहे नागरिकता विवादों के समाधान को भी दर्शाता है।
बांग्लादेश से पलायन और नागरिकता विवाद
जानकारी के अनुसार दीपाली दास अपने पति के साथ 7 फरवरी 1988 को कथित उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश से भारत आई थीं। दोनों ने कछार जिले में बसकर अपना जीवन शुरू किया। हालांकि समय के साथ उनके पास भारतीय नागरिकता साबित करने के पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने के कारण उनकी पहचान पर सवाल उठने लगे।
साल 2013 में प्रशासन ने उनकी नागरिकता की जांच शुरू की। पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट में कहा गया कि वे मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाली विदेशी नागरिक हैं। इसके बाद उनके मामले में लंबे समय तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया चलती रही, जिससे उनकी स्थिति अनिश्चित बनी रही।
हिरासत और कोविड काल में रिहाई
2019 में विदेशी घोषित किए जाने के बाद दीपाली दास को सिलचर स्थित एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया। उन्होंने लगभग दो वर्ष तक इस हिरासत केंद्र में समय बिताया। इसी दौरान कोविड-19 महामारी के समय सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल 2020 में आदेश दिया कि दो वर्ष से अधिक समय से हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों को भीड़ कम करने के लिए रिहा किया जाए।
इस आदेश के बाद दीपाली दास को जमानत पर रिहाई मिली। हालांकि जेल से बाहर आने के बावजूद उनकी नागरिकता का सवाल अभी भी अनसुलझा ही था, जिससे उनके और उनके परिवार के जीवन पर लगातार अनिश्चितता बनी रही।
कानूनी सहायता और सीएए के तहत नागरिकता
रिहाई के बाद सामाजिक कार्यकर्ता कमल चक्रवर्ती ने दीपाली दास की मदद की और उन्हें अधिवक्ता धर्मानंद देब से जोड़ा। इसके बाद उनके वकील ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत आवेदन तैयार किया और कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
दिलचस्प बात यह रही कि पहले जो पुलिस चार्जशीट उनके खिलाफ थी, वही दस्तावेज बाद में उनके बांग्लादेश से आने के प्रमाण के रूप में सीएए आवेदन में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन गया। अंततः इस प्रक्रिया के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र जारी किया गया, जिससे उन्हें औपचारिक रूप से भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता मिल गई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) दिसंबर 2019 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था।
- यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता पाने का मार्ग प्रदान करता है।
- सीएए के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को पात्र माना गया है।
- इसके लिए पात्र व्यक्ति को 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश करना आवश्यक है।
दीपाली दास की नागरिकता स्वीकृति उनके परिवार के लिए भी बड़ी राहत लेकर आई है। उनके छह बच्चे हैं—एक बेटा और पांच बेटियां—जिनमें से कई भारत में अपने जीवन और करियर स्थापित कर चुके हैं। नागरिकता मिलने से न केवल उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य से जुड़ी संभावित कानूनी जटिलताओं का भी समाधान हो गया है। यह मामला असम में नागरिकता संबंधी मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।