असम में विशेष निर्वाचक सूची संशोधन और डी-वोटर व्यवस्था
असम में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग ने राज्य की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष सारांश संशोधन प्रक्रिया शुरू की है। यह प्रक्रिया अन्य राज्यों में चल रही व्यापक संशोधन गतिविधियों से अलग है और असम की विशिष्ट नागरिकता व्यवस्था तथा ऐतिहासिक समझौतों से सीधे जुड़ी हुई है। इस संशोधन का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और नागरिकता से जुड़े संवेदनशील मामलों को कानूनी दायरे में ही संभालना है।
विशेष संशोधन प्रक्रिया कैसे चलेगी
इस संशोधन में बूथ-स्तरीय अधिकारी 22 नवंबर से घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करेंगे। उनके पास खाली फॉर्म नहीं होंगे, बल्कि पहले से भरे हुए रजिस्टर होंगे जिनमें मौजूदा मतदाताओं का विवरण दर्ज होगा। अधिकारी प्रविष्टियों की जांच करेंगे, हट चुके या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करेंगे, और नए नाम जोड़ने, हटाने या सुधार से संबंधित आवेदन भी साथ लाए गए मानक फॉर्मों पर भरवाएंगे। इससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और तथ्यपरक होने की उम्मीद है।
संशोधन के दौरान डी-वोटरों की स्थिति
इस विशेष संशोधन में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि डी-वोटरों का सत्यापन नहीं किया जाएगा। जिन नागरिकों को वर्तमान में “डाउटफुल” या संदेहास्पद मतदाता के रूप में चिह्नित किया गया है, उनकी स्थिति यथावत बनी रहेगी। उनके नामों के सामने लगाया गया “D” चिन्ह ड्राफ्ट सूची में बिना किसी परिवर्तन के जारी रहेगा। किसी भी डी-वोटर की स्थिति में बदलाव केवल विदेशी न्यायाधिकरण या न्यायालय के आदेश से ही संभव होगा, इसलिए प्रशासनिक अधिकारी इस स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं कर सकते।
डी-वोटर श्रेणी की पृष्ठभूमि
डी-वोटर व्यवस्था 1985 के असम समझौते से जुड़ी है, जिसमें यह प्रावधान था कि 24 मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से राज्य में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को विदेशी माना जाएगा। वर्ष 1997 में मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया के दौरान हजारों लोगों को संदेहास्पद मतदाता के रूप में चिह्नित किया गया था। इन व्यक्तियों को अपनी भारतीय नागरिकता सिद्ध करने के लिए विदेशी न्यायाधिकरणों के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। वर्तमान में राज्य में लगभग एक लाख के आसपास डी-वोटर शामिल हैं, जिनकी कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग मामलों के आधार पर जारी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डी-वोटर वे व्यक्ति हैं जिनकी नागरिकता की जांच असम में जारी है।
- “D” टैग केवल न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश से ही हट सकता है।
- विशेष संशोधन में प्री-फिल्ड रजिस्टर का उपयोग किया जा रहा है, न कि खाली फॉर्मों का।
- अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
असम में चल रही यह प्रक्रिया 2026 के चुनावों से पहले मतदाता सूची को मजबूत और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। हालांकि, डी-वोटरों की स्थिति में कोई प्रशासनिक बदलाव न होने से यह वर्ग अभी भी मतदान अधिकार से वंचित रहेगा, जब तक कि उन्हें कानूनी मंजूरी नहीं मिल जाती। यह पूरी व्यवस्था नागरिकता सत्यापन, एनआरसी प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता से गहराई से जुड़ी है, जिसका अंतिम उद्देश्य निष्पक्ष और सटीक चुनाव सुनिश्चित करना है।