असम में चाय जनजातियों को उच्च सरकारी पदों में 3% आरक्षण और एमएमयूए योजना का विस्तार

असम में चाय जनजातियों को उच्च सरकारी पदों में 3% आरक्षण और एमएमयूए योजना का विस्तार

असम विधानसभा चुनावों से पहले राज्य मंत्रिमंडल ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए चाय जनजाति और आदिवासी समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे के भीतर कक्षा I और कक्षा II सरकारी नौकरियों में 3% आरक्षण देने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही ‘मिशन फॉर माइनॉरिटी एंड अंडरप्रिविलेज्ड एरियाज’ (एमएमयूए) योजना का विस्तार कर एक लाख से अधिक अतिरिक्त महिला लाभार्थियों को शामिल किया गया है। इन निर्णयों को सामाजिक समावेशन और राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

उच्च पदों तक आरक्षण का विस्तार

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने बताया कि अब तक चाय जनजाति और आदिवासी समुदायों को आरक्षण केवल ग्रेड III और ग्रेड IV पदों तक सीमित था। नए निर्णय के तहत 3% आरक्षण को ग्रेड I और ग्रेड II पदों तक विस्तारित किया गया है, जिनमें राज्य सिविल सेवा और प्राध्यापक स्तर के पद भी शामिल हैं।

यह संशोधित नीति अगले वर्ष से उच्च स्तरीय भर्तियों पर लागू होगी, जबकि जिन अन्य पदों के विज्ञापन तुरंत जारी होंगे, उन पर यह प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। यह कदम ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के लिए प्रशासनिक और शैक्षणिक उच्च पदों तक पहुंच का मार्ग खोलने वाला माना जा रहा है।

एमएमयूए योजना का विस्तार

मंत्रिमंडल ने एमएमयूए योजना के तहत 1,07,532 अतिरिक्त स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को शामिल करने की स्वीकृति दी है। अब तक लगभग 32 लाख महिलाओं को इस योजना के अंतर्गत 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।

यह योजना विशेष रूप से अल्पसंख्यक और वंचित पृष्ठभूमि की महिलाओं को उद्यमिता और वित्तीय समावेशन की दिशा में सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। विस्तार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र महिला लाभ से वंचित न रहे।

चुनावी संदर्भ और सामाजिक प्रभाव

Assam Legislative Assembly की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव मार्च–अप्रैल में प्रस्तावित हैं। राज्य की राजनीतिक संरचना में चाय जनजातियां, आदिवासी समुदाय और महिला मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में इन नीतिगत घोषणाओं को सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार समावेशन, प्रतिनिधित्व और आर्थिक भागीदारी को प्रमुख मुद्दों के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* असम विधानसभा में कुल 126 सदस्य होते हैं।
* ओबीसी आरक्षण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत प्रदान किया जाता है।
* असम की चाय जनजातियां औपनिवेशिक काल में बागान श्रमिकों के रूप में लाए गए आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं।
* स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) महिलाओं में बचत और सूक्ष्म उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले सामुदायिक समूह होते हैं।

मंत्रिमंडल के ये निर्णय असम में सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन को गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। उच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंच और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देकर राज्य सरकार व्यापक सामाजिक संतुलन और विकासात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

Originally written on February 18, 2026 and last modified on February 18, 2026.

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