असम में ऐतिहासिक भूमि सुधार: चाय बागान मजदूरों को मिलेगा घर का मालिकाना हक
असम सरकार ने एक लंबे समय से चली आ रही सामाजिक असमानता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य विधानसभा में पारित “असम भूमि धारण सीमा निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 2025” के तहत अब चाय बागानों में रहने वाले मजदूर परिवारों को उनके आवासीय भूमि पर वैधानिक स्वामित्व प्राप्त होगा। सरकार ने इस सुधार को “ऐतिहासिक सुधारात्मक कदम” बताया है, जो राज्य के लाखों चाय श्रमिकों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।
संशोधन की मुख्य विशेषताएँ
नए कानून के अनुसार, चाय बागानों की “लेबर लाइनों” यानी मजदूर बस्तियों को अब चाय उत्पादन से जुड़ी सहायक भूमि की श्रेणी से हटा दिया गया है। इससे इन बस्तियों में रहने वाले परिवारों को आवासीय भूमि का औपचारिक स्वामित्व मिल सकेगा। सरकार द्वारा प्रत्येक परिवार को आवंटित भूमि के आकार की अधिसूचना जारी की जाएगी और प्रभावित पक्षों को लगभग ₹65 करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यह क्षतिपूर्ति प्रति बीघा ₹3,000 की दर से निर्धारित की गई है।
राजनीतिक बहस और विपक्ष का विरोध
विधानसभा में इस संशोधन पर तीखी बहस हुई। विपक्षी दल AIUDF ने नदी तटीय चर क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को भी समान भूमि अधिकार देने की मांग उठाई। इसके विरोध में विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की और सदन के बीच में उतरकर प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी जवाबी नारे लगाए। अंततः वॉयस वोट के माध्यम से बिल पारित किया गया, जिसके बाद AIUDF ने सदन से वॉकआउट कर लिया।
सरकार का पक्ष और भविष्य की योजनाएँ
मुख्यमंत्री ने इस कानून को चाय जनजातियों के प्रति दशकों से चली आ रही अन्यायपूर्ण स्थिति को सुधारने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार चर क्षेत्रों में भी सर्वे कर रही है और पात्र निवासियों को उचित समय पर भूमि अधिकार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, नए स्वामित्व वाले परिवारों को घर निर्माण हेतु अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की घोषणा भी की गई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- असम में लगभग 825 चाय बागान हैं, जिनमें दो लाख से अधिक बीघा भूमि पर मजदूर कॉलोनियाँ बसी हैं।
- नया संशोधन चाय बागानों की लेबर लाइनों को “सहायक भूमि” की श्रेणी से हटाता है।
- प्रभावित पक्षों को कुल ₹65.57 करोड़ का मुआवज़ा दिया जाएगा।
- विपक्ष का विरोध चर क्षेत्र के निवासियों को समान भूमि अधिकार देने की मांग को लेकर था।
चाय श्रमिकों के जीवन में परिवर्तन की दिशा
इस सुधार के माध्यम से पहली बार हजारों चाय मजदूर परिवार अपने घरों के कानूनी मालिक बनेंगे। इससे उनके सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी, जीवन-स्तर सुधरेगा और स्थायी बसावट को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम असम की भूमि नीति में संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक है, जो राज्य की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण श्रमिक समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित होगी।