असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में खोजी गई नई पौध प्रजाति “ओसबेकिया जुबीनगार्गियाना”
असम के प्रसिद्ध मानस राष्ट्रीय उद्यान से वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। गुवाहाटी विश्वविद्यालय के वनस्पतिशास्त्रियों ने यहां एक नई पौध प्रजाति की पहचान की है, जिसका नाम प्रसिद्ध असमिया गायक जुबीन गर्ग के सम्मान में “ओसबेकिया जुबीनगार्गियाना” रखा गया है। यह खोज क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है और पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के महत्व को एक बार फिर उजागर करती है।
यह नई प्रजाति वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विस्तृत वनस्पति सर्वेक्षण के दौरान सामने आई, जो 2021 से 2025 के बीच मानस राष्ट्रीय उद्यान के घास के मैदानों में किए गए थे। यह राष्ट्रीय उद्यान असम के बक्सा जिले में स्थित है और अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है।
मानस राष्ट्रीय उद्यान में हुई महत्वपूर्ण खोज
इस नई पौध प्रजाति की खोज गुवाहाटी विश्वविद्यालय की शोधकर्ता बरनाली दास और नमिता नाथ ने की, जिनके साथ केरल के एनएसएस कॉलेज के शोधकर्ता प्रसोभ पुलप्रा भी शामिल थे। वैज्ञानिकों ने इसे “ओसबेकिया जुबीनगार्गियाना” नाम दिया है।
यह प्रजाति मेलास्टोमेटेसी परिवार से संबंधित है और “ओसबेकिया” वंश का हिस्सा है। इस शोध से जुड़े निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल “फाइटोटैक्सा” में प्रकाशित किए गए, जो पौध वर्गीकरण और जैव विविधता से जुड़े अनुसंधानों के लिए जाना जाता है।
नई प्रजाति की प्रमुख विशेषताएँ
वैज्ञानिकों के अनुसार यह पौधा एक बहुवर्षीय झाड़ी है, जिसकी ऊँचाई लगभग 2.5 से 3.5 मीटर तक होती है। इसमें गुलाबी रंग के फूलों के गुच्छे लगते हैं, जिनकी लंबाई लगभग 2.5 से 3 सेंटीमीटर तक होती है।
इस पौधे में फूल आने का समय सामान्यतः सितंबर के मध्य से जनवरी तक होता है। देखने में यह पौधा “ओसबेकिया रोस्ट्राटा” से मिलता-जुलता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसकी संरचना और अन्य विशेषताओं का अध्ययन कर यह पुष्टि की कि यह एक अलग और नई प्रजाति है।
“ओसबेकिया” वंश में पहले से ही 40 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों में फैली हुई हैं। इस नई प्रजाति की खोज इस वंश के वैज्ञानिक अध्ययन को और समृद्ध बनाती है।
संरक्षण स्थिति और वैज्ञानिक महत्व
शोधकर्ताओं ने अपने सर्वेक्षण के दौरान इस पौधे की अपेक्षाकृत बड़ी आबादी देखी। हालांकि, अभी इसके दीर्घकालिक पारिस्थितिक आंकड़े सीमित हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट के तहत इसकी संरक्षण स्थिति फिलहाल “डेटा डिफिशिएंट” यानी अपर्याप्त जानकारी की श्रेणी में रखी गई है।
यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानस राष्ट्रीय उद्यान और पूर्वोत्तर भारत के पारिस्थितिक महत्व को भी उजागर करती है। इस क्षेत्र में लगातार नए जीव और पौधों की प्रजातियाँ खोजी जा रही हैं, जो यहां की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का प्रमाण हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- “ओसबेकिया जुबीनगार्गियाना” असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में खोजी गई नई पौध प्रजाति है।
- यह मेलास्टोमेटेसी परिवार और “ओसबेकिया” वंश से संबंधित है।
- इस खोज के शोध परिणाम वैज्ञानिक जर्नल “फाइटोटैक्सा” में प्रकाशित किए गए हैं।
- मानस राष्ट्रीय उद्यान असम में स्थित एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और जैव विविधता हॉटस्पॉट है।
इस नई प्रजाति का नाम प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग के नाम पर रखा जाना सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के अनूठे संगम का प्रतीक है। साथ ही यह खोज यह भी दर्शाती है कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अभी भी जैव विविधता के अनेक रहस्य छिपे हुए हैं, जिनका वैज्ञानिक अध्ययन भविष्य में संरक्षण और पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।