अर्पिता पात्रा: दुनिया के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी शिखर पर पहुंचने वाली भारतीय वैज्ञानिक
भारतीय विज्ञान संस्थान की प्रोफेसर अर्पिता पात्रा ने दुनिया के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी शिखर नेवाडो ओजोस डेल सालाडो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 6 मार्च को 6,893 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस शिखर पर पहुँचकर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय महिला बन गईं। यह सफलता न केवल भारतीय पर्वतारोहण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और साहसिक अभियानों के बीच संतुलन संभव है।
दुनिया के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी की चढ़ाई
नेवाडो ओजोस डेल सालाडो चिली और अर्जेंटीना की सीमा पर स्थित अटाकामा मरुस्थल में स्थित है और इसे विश्व का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी माना जाता है। इस पर्वत की चढ़ाई अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यहाँ कठोर मौसम, अत्यधिक ऊँचाई और तकनीकी कठिनाइयाँ होती हैं। अर्पिता पात्रा के अनुसार इस अभियान के दौरान उन्हें लगभग 7,000 मीटर की ऊँचाई तक पहुँचना पड़ा, जो उनके पर्वतारोहण जीवन की अब तक की सबसे अधिक ऊँचाई थी। अंतिम चरण में अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और शिखर से पहले लगभग 50 मीटर की तकनीकी रॉक क्लाइम्बिंग जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
वैश्विक ज्वालामुखी शिखर अभियान का हिस्सा
ओजोस डेल सालाडो की सफल चढ़ाई अर्पिता पात्रा की पर्वतारोहण उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे पहले वह चार महाद्वीपों के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी शिखरों पर भी चढ़ाई कर चुकी हैं। इनमें अफ्रीका का माउंट किलिमंजारो, यूरोप का माउंट एल्ब्रुस, ओशिनिया का माउंट गिलुवे और उत्तरी अमेरिका का पिको डे ओरिजाबा शामिल हैं। मई 2025 में माउंट गिलुवे पर चढ़ाई करने वाली वह पहली भारतीय महिला बनी थीं, जबकि अक्टूबर 2025 में पिको डे ओरिजाबा पर चढ़ाई कर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं।
वैज्ञानिक करियर और पर्वतारोहण के बीच संतुलन
पर्वतारोहण में उल्लेखनीय उपलब्धियों के बावजूद अर्पिता पात्रा भारतीय विज्ञान संस्थान के कंप्यूटर विज्ञान और स्वचालन विभाग में पूर्णकालिक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि अकादमिक शोध और उच्च पर्वतीय अभियानों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ अत्यंत प्रेरणादायक भी रहा है। उन्होंने प्रसिद्ध भारतीय पर्वतारोही सत्यरूप सिद्धांत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो कई विश्व रिकॉर्ड और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के धारक हैं और जिन्होंने उनके पर्वतारोहण करियर में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया है।
विज्ञान और साहसिक अभियानों के लिए प्रेरणा
अर्पिता पात्रा की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि कठिन वैज्ञानिक करियर और साहसिक गतिविधियाँ साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं। विभिन्न महाद्वीपों के सबसे ऊँचे ज्वालामुखी शिखरों पर उनकी सफल यात्राएँ उनके समर्पण, धैर्य और तैयारी को दर्शाती हैं। यह उपलब्धि वैश्विक पर्वतारोहण में भारतीय महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी उजागर करती है और छात्रों तथा शोधकर्ताओं को अपने शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ विविध रुचियों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नेवाडो ओजोस डेल सालाडो 6,893 मीटर ऊँचा विश्व का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी है।
- यह पर्वत चिली और अर्जेंटीना की सीमा पर अटाकामा मरुस्थल में स्थित है।
- माउंट किलिमंजारो तंजानिया में स्थित अफ्रीका का सबसे ऊँचा पर्वत है।
- पिको डे ओरिजाबा मेक्सिको में स्थित उत्तरी अमेरिका का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी है।