अरुणाचल प्रदेश में मनाया गया 63वां वालोंग दिवस: शौर्य और एकता का प्रतीक

अरुणाचल प्रदेश में मनाया गया 63वां वालोंग दिवस: शौर्य और एकता का प्रतीक

अरुणाचल प्रदेश के वालोंग में 15 और 16 नवंबर 2025 को आयोजित 63वें वालोंग दिवस समारोह में सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और नागरिकों ने 1962 के युद्ध में भारतीय सैनिकों के अद्वितीय साहस को नमन किया। यह आयोजन शौर्य, बलिदान और सेना-नागरिक एकता की उस अमर भावना का प्रतीक रहा जिसने भारत की पूर्वी सीमाओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1962 की वालोंग लड़ाई के वीरों को श्रद्धांजलि

समारोह में पूर्वी सेना कमांडर, स्पीयर कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) और अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वालोंग युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पण रहा, जिसके पश्चात उन सैनिकों की स्मृति में प्रतिमाओं का अनावरण किया गया जिन्होंने दुर्गम हिमालयी मोर्चे पर वीरगति प्राप्त की थी। इस अवसर पर सेना के बैंड और स्थानीय स्कूली बच्चों ने देशभक्ति गीतों से वातावरण को भावनात्मक बना दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी वालोंग दिवस की पूर्व संध्या

15 नवंबर की शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लाइट एंड साउंड शो, ड्रोन फॉर्मेशन डिस्प्ले, और सैंड आर्ट इंस्टॉलेशन शामिल रहे, जिन्होंने 1962 की भीषण लड़ाई की कहानी को जीवंत कर दिया। स्थानीय कलाकारों और सेना के जवानों ने संयुक्त रूप से प्रस्तुत नृत्य और संगीत कार्यक्रमों में सैनिकों के साहस, ठंडे मौसम में संघर्ष और देशप्रेम की गाथा को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया।

विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने युद्ध में शहीद हुए 388 भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और सेना तथा स्थानीय समुदायों के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार वालोंग को ऐतिहासिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगी। इस दिशा में सनराइज़ फेस्टिवल, वार मेमोरियल म्यूज़ियम, तथा बेहतर सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • 1962 की वालोंग लड़ाई में भारतीय सैनिकों ने 27 दिनों तक चीनी सेना के खिलाफ मोर्चा संभाले रखा।
  • 63वें समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, मैराथन, ट्रेक और ऐतिहासिक अभियानों का आयोजन हुआ।
  • वालोंग वार मेमोरियल और हेलमेट टॉप वार मेमोरियल प्रमुख स्मारक स्थल हैं।
  • सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में वार्षिक उत्सवों और अवसंरचना उन्नयन की योजना है।

पूर्व सैनिकों का सम्मान और जनता की भागीदारी

समारोह में 4 सिख रेजिमेंट सहित कई इकाइयों के पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों का विशेष सम्मान किया गया। सेना और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद ने समारोह को भावनात्मक गहराई दी। पारंपरिक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि “वालोंग की भावना” आज भी सीमांत भारत की प्रेरणा और गौरव का स्रोत बनी हुई है।

Originally written on November 18, 2025 and last modified on November 18, 2025.

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