अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में अद्वितीय अदरक प्रजाति “Parakaempferia alba” की खोज
अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में वैज्ञानिकों ने अदरक की एक नई प्रजाति “Parakaempferia alba” की खोज की है। यह खोज पूर्वी हिमालय क्षेत्र को विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक के रूप में फिर से स्थापित करती है। यह खोज न केवल भारत के वनस्पति विज्ञान खजाने को समृद्ध करती है, बल्कि कम अन्वेषित वनों और जल-आधारित पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के महत्व को भी उजागर करती है।
खोज और प्रकाशन विवरण
इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक विवरण Nordic Journal of Botany में प्रकाशित हुआ है, जिससे इसे वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है।
इस अनुसंधान टीम में शामिल थे:
- टाटुम मिबांग
- बिपंकर हाजोंग
- देवप्रतिम कोच
- पंकज भाराली
वैज्ञानिकों ने इस खोज को पूर्वी हिमालय में सतत वनस्पति अन्वेषण की आवश्यकता का प्रतीक बताया।
आवास और पारिस्थितिक स्थिति
“Parakaempferia alba” को पूर्व सियांग जिले के मिगलुंग क्षेत्र में खोजा गया।
यह पौधा 150 से 400 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है और इसकी वृद्धि:
- आर्द्र, छायायुक्त जलधाराओं के किनारे
- रेतीली मिट्टी
- नम जलवायु
में होती है।
इससे स्पष्ट होता है कि यह प्रजाति संवेदनशील माइक्रो-हैबिटैट्स में पनपती है, जो वनों और ताजे जल के पारिस्थितिकी तंत्र से घनिष्ठ रूप से जुड़ी होती है।
वर्गिकी और वैज्ञानिक महत्व
यह नई प्रजाति Zingiberaceae (अदरक कुल) से संबंधित है, जो कि पाक, औषधीय और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का समूह है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खोज:
- Parakaempferia वंश की विविधता को बढ़ाती है
- सियांग घाटी क्षेत्र में अप्रलेखित पौधों की संभावित उपस्थिति को बल देती है
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- “Parakaempferia alba” अदरक कुल (Zingiberaceae) की एक नई खोजी गई प्रजाति है
- यह सियांग घाटी, अरुणाचल प्रदेश में पाई गई है
- पूर्वी हिमालय को वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त है
- ऐसी वनस्पति खोजें संरक्षण योजना और पारिस्थितिक मूल्यांकन में सहायक होती हैं
संभावित उपयोग और संरक्षण की प्रासंगिकता
वैज्ञानिकों का मानना है कि “Parakaempferia alba” में औषधीय या आर्थिक संभावनाएँ हो सकती हैं, लेकिन इसके लिए आगे फाइटोकेमिकल और अनुप्रयुक्त अनुसंधान की आवश्यकता है।
यह खोज इस बात पर भी बल देती है कि जंगलों से लगे जल स्रोतों वाले निवास स्थान, जो जलवायु परिवर्तन और भूमि उपयोग में बदलाव के कारण तेजी से संकटग्रस्त हो रहे हैं, उन्हें संरक्षित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
“Parakaempferia alba” जैसी खोजें हमें न केवल प्राकृतिक धरोहर की गहराई का ज्ञान कराती हैं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा की आवश्यकता की भी याद दिलाती हैं।