अरुणाचल प्रदेश का कमला जलविद्युत परियोजना: भारत की हरित ऊर्जा दिशा में बड़ा कदम

अरुणाचल प्रदेश का कमला जलविद्युत परियोजना: भारत की हरित ऊर्जा दिशा में बड़ा कदम

भारत सरकार ने पुरानी निर्णय लेने वाली संस्था–पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) द्वारा ₹26,070 करोड़ की कमला जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है, जो देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने और 2070 तक नेट‑जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन में योगदान देगी बल्कि पूर्वोत्तर के विकास और बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

परियोजना का परिचय और स्थान

कमला जलविद्युत परियोजना, जिसे पहले “सुबनसिरी मिडल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट” के नाम से जाना जाता था, एक भंडारण आधारित योजना है जिसमें बाढ़ नियंत्रण प्रणाली भी शामिल है। यह कमला नदी पर प्रस्तावित है और अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों–कमले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे में फैली हुई है। यह परियोजना प्रति वर्ष लगभग 6,870 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन करने की क्षमता रखती है, जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय ग्रिड को स्थिरता प्रदान करेगी।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं है, बल्कि नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करके बाढ़‑रिलीज ऑफ़र करना भी है, विशेषकर ब्रह्मपुत्र घाटी में, जहां मौसम के अनुसार बाढ़ का जोखिम बार‑बार होता है। इस पहल से स्थानीय कृषि, आवासीय इलाकों और बुनियादी ढांचे को बाढ़ के दुष्प्रभाव से सुरक्षा मिलेगी।

तकनीकी विशेषताएँ और निर्माण योजना

इस परियोजना में 216 मीटर ऊँची कंक्रीट ग्रेविटी डैम और भूमिगत पावरहाउस का निर्माण शामिल है। डैम की ऊँचाई और डिजाइन इसे एक विशाल ऊर्जा भंडारण इकाई बनाती है जो लघु तथा दीर्घकालिक ऊर्जा दुबारा आपूर्ति कर सकती है। निर्माण कार्य लगभग 96 महीनों की निर्धारित अवधि में पूरा किया जाना है, जो परियोजना की जटिलता और भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध है।

डैम के निर्माण से कमला नदी के जल को सुरक्षित रूप से भंडारित किया जा सकेगा, जिससे सूखे मौसम में भी विद्युत उत्पादन जारी रहेगा। भूमिगत पावरहाउस से विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली और कारगर होगी।

निवेश संरचना और वित्तीय समर्थन

यह परियोजना एक संयुक्त उद्यम कंपनी के माध्यम से ‘बिल्ड‑ओन‑ओनर‑ऑपरेट‑ट्रांसफर’ (बीओओटी) आधार पर लागू की जाएगी। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) इसका 74 प्रतिशत इक्विटी हिस्सा रखेगी, जबकि अरुणाचल प्रदेश सरकार के पास 26 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। परियोजना की कुल लागत अनुमानित ₹26,069.5 करोड़ है और इसका वित्तपोषण 70:30 ऋण‑इक्विटी अनुपात में किया जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा ₹1,340 करोड़ बुनियादी ढांचे के समर्थन हेतु और ₹4,744 करोड़ बाढ़ नियंत्रण घटक के लिए प्रदान किए जाएंगे, साथ ही राज्य सरकार द्वारा राज्य जीएसटी की पूर्ण प्रतिपूर्ति की व्यवस्था है। इसके अलावा उत्पादन पर प्रति यूनिट ₹5.97 का स्तरीकृत शुल्क अनुमानित है, जिससे यह परियोजना आर्थिक दृष्टि से भी आकर्षक बनती है।

रोजगार और क्षेत्रीय प्रभाव

निर्माण के चरम समय पर इस परियोजना से लगभग 300 प्रत्यक्ष रोजगार और करीब 2,500 अनुबंध आधारित नौकरियों का सृजन होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और सामाजिक‑आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। साथ ही दूरदराज के जिलों में बुनियादी ढांचे का विकास भी तेजी से होगा।

परियोजना से न सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय ग्रिड से और अधिक स्थिरता के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कमला जलविद्युत परियोजना की स्थापित क्षमता 1,720 मेगावाट है।
  • यह एक भंडारण आधारित हाइड्रोपावर परियोजना है, जिसमें बाढ़ नियंत्रण घटक भी शामिल है।
  • परियोजना अरुणाचल प्रदेश के कमले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में स्थित है।
  • एनएचपीसी परियोजना में 74 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी रखती है।

इस प्रकार, कमला जलविद्युत परियोजना भारत की ऊर्जा स्वावलंबन और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक प्रगति को भी स्थायित्व मिलेगा, और राष्ट्रीय हरित ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग मिलेगा।

Originally written on January 10, 2026 and last modified on January 10, 2026.

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