अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ फैसले को असंवैधानिक बताया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ फैसले को असंवैधानिक बताया

संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। छह–तीन के बहुमत से दिए गए इस ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास बिना कांग्रेस की अनुमति के ऐसे कर लगाने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय अमेरिकी संविधान में शक्ति विभाजन और कानून के शासन की मजबूती का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने कहा कि टैरिफ मूल रूप से कर का ही एक रूप हैं और कर लगाने का अधिकार संविधान के अनुसार केवल विधायिका यानी कांग्रेस को प्राप्त है।

टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि

वर्ष 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगभग सभी देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर लगभग 10 प्रतिशत तक का व्यापक टैरिफ लगा दिया था। प्रशासन ने इस निर्णय को उचित ठहराने के लिए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का हवाला दिया था। सरकार का दावा था कि यह कानून राष्ट्रपति को आर्थिक आपातकाल घोषित कर वैश्विक स्तर पर आर्थिक कदम उठाने का अधिकार देता है।

इन टैरिफों का उद्देश्य यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बनाकर व्यापार समझौतों को फिर से वार्ता के लिए मजबूर करना था। अर्थशास्त्रियों के अनुसार इन शुल्कों से अमेरिकी सरकार को लगभग 175 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। हालांकि कई विशेषज्ञों और व्यापार समूहों ने इसे राष्ट्रपति की शक्तियों का अतिक्रमण बताया और इसे कानूनी चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक व्याख्या

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए बहुमत के निर्णय में कहा गया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति प्रदान नहीं करता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब भी कांग्रेस ने राष्ट्रपति को टैरिफ से जुड़ी शक्तियाँ दी हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से और सीमाओं के साथ प्रदान किया गया है।

इस निर्णय का समर्थन न्यायाधीश नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट, एलेना केगन, सोनिया सोतोमयोर और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने किया। कुछ न्यायाधीशों ने “मेजर क्वेश्चन सिद्धांत” का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार यदि किसी कार्यवाही के बड़े आर्थिक या राजनीतिक प्रभाव हों तो उसके लिए विधायिका की स्पष्ट अनुमति आवश्यक होती है।

वैश्विक व्यापार और नीति पर प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर व्यापार नीति तय करने की सीमा स्पष्ट हो गई है। साथ ही उन कंपनियों के लिए भी नई संभावनाएँ खुल सकती हैं जिन्होंने इन टैरिफों के तहत कर का भुगतान किया था, क्योंकि अब वे धनवापसी की मांग कर सकती हैं।

हालांकि फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह प्रावधान सरकार को अधिकतम 150 दिनों तक अस्थायी व्यापार प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर आगे भी कानूनी चुनौतियाँ और नीति संबंधी अनिश्चितताएँ बनी रह सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अमेरिकी संविधान के अनुसार कर लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास होता है।
  • इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट वर्ष 1977 में लागू किया गया था।
  • “मेजर क्वेश्चन सिद्धांत” के अनुसार बड़े आर्थिक या राजनीतिक प्रभाव वाले निर्णयों के लिए विधायिका की स्पष्ट अनुमति आवश्यक होती है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट संविधान की व्याख्या करने वाला सर्वोच्च न्यायिक संस्थान है।

यह निर्णय न केवल अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था में शक्तियों के संतुलन को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक व्यापार नीतियों पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि बड़े आर्थिक निर्णयों के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वीकृति और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

Originally written on March 6, 2026 and last modified on March 6, 2026.

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