अमेरिका में मम्प्स संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य विभाग सतर्क

अमेरिका में मम्प्स संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य विभाग सतर्क

संयुक्त राज्य अमेरिका में हाल ही में मम्प्स संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे एक बार फिर इस टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारी पर ध्यान केंद्रित हुआ है। मैरीलैंड राज्य में वर्ष 2026 में अब तक मम्प्स के 26 मामले सामने आए हैं, जिनमें 19 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 7 संभावित मामले हैं। वहीं, अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार फरवरी के अंत तक देश के 11 क्षेत्रों में कुल 34 मामले दर्ज किए गए। पिछले कई दशकों में टीकाकरण के कारण मम्प्स के मामलों में काफी कमी आई है, लेकिन समय-समय पर इसके प्रकोप देखने को मिलते रहते हैं।

मम्प्स वायरस क्या है

मम्प्स एक संक्रामक वायरल रोग है जो पैरामिक्सोवायरस परिवार के वायरस के कारण होता है। यह मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है, विशेषकर कानों के पास स्थित पैरोटिड ग्रंथियों को। यह संक्रमण खांसने, छींकने, बोलने या संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन और पेय पदार्थ साझा करने से फैलता है। इस रोग को नियंत्रित करना इसलिए चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखाई देने से कई दिन पहले ही वायरस फैलाना शुरू कर सकता है और ग्रंथियों में सूजन आने के लगभग पाँच दिन बाद तक संक्रमण फैलाने में सक्षम रहता है।

लक्षण और बीमारी की प्रगति

मम्प्स का सबसे स्पष्ट लक्षण एक या दोनों पैरोटिड ग्रंथियों में सूजन है, जिससे गाल फूले हुए दिखाई देते हैं और जबड़े में दर्द होता है। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और भूख कम लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। सामान्यतः वायरस के संपर्क में आने के दो से तीन सप्ताह बाद लक्षण प्रकट होते हैं। छोटे बच्चों में यह बीमारी अक्सर हल्की होती है और कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकती है। हालांकि किशोरों और वयस्कों में इसके लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं, इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले स्थानों में इसके प्रकोप की संभावना अधिक रहती है।

संभावित जटिलताएँ और जोखिम समूह

अधिकांश मामलों में मरीज बिना किसी दीर्घकालिक समस्या के ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर जटिलताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। इनमें अंडकोष में सूजन जिसे ऑर्काइटिस कहा जाता है, और महिलाओं में अंडाशय की सूजन जिसे ओओफोराइटिस कहा जाता है, शामिल हैं। दुर्लभ मामलों में यह संक्रमण तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है और मेनिन्जाइटिस या एन्सेफलाइटिस जैसी समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। कभी-कभी स्थायी सुनने की क्षमता में कमी भी देखी गई है। जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, उनमें संक्रमण और जटिलताओं का जोखिम सबसे अधिक होता है।

टीकाकरण की भूमिका और प्रकोप की संभावना

मम्प्स से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एमएमआर टीका है, जो खसरा, मम्प्स और रुबेला तीनों रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस टीके की दो खुराक लगभग 86 प्रतिशत तक सुरक्षा देती हैं, जबकि एक खुराक लगभग 72 प्रतिशत तक प्रभावी होती है। हालांकि कोई भी टीका पूरी तरह से संक्रमण को रोकने में सक्षम नहीं होता, इसलिए टीका लगवाने के बाद भी कभी-कभी संक्रमण के मामले सामने आ सकते हैं। ऐसे मामलों में बीमारी आमतौर पर हल्की होती है और गंभीर जटिलताओं की संभावना कम रहती है, लेकिन भीड़भाड़ वाले स्थानों में यह संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मम्प्स एक वायरल रोग है जो पैरामिक्सोवायरस परिवार के वायरस से होता है।
  • यह संक्रमण मुख्य रूप से श्वसन बूंदों और लार के माध्यम से फैलता है।
  • एमएमआर टीका खसरा, मम्प्स और रुबेला से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • एमएमआर टीके की दो खुराक मम्प्स संक्रमण को रोकने में लगभग 86 प्रतिशत प्रभावी मानी जाती हैं।

मम्प्स के मामलों में हालिया वृद्धि यह दर्शाती है कि टीकाकरण कार्यक्रमों को लगातार मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही लोगों में जागरूकता और समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करके इस तरह की संक्रामक बीमारियों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Originally written on March 9, 2026 and last modified on March 9, 2026.

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