अमेरिका-दक्षिण कोरिया व्यापार तनाव में तीव्र वृद्धि: ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ बढ़ाए
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापारिक तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरियाई आयातों पर भारी शुल्क बढ़ोतरी की घोषणा की। यह कदम 2025 में दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत दक्षिण कोरिया द्वारा किए गए वादों को पूरा न करने के आरोपों के बीच उठाया गया है।
टैरिफ वृद्धि का विवरण
ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण कोरिया से आयातित वस्तुओं पर शुल्क दर को 15% से बढ़ाकर 25% कर दिया है। यह उच्च शुल्क वाहन, लकड़ी, दवाइयाँ और “अन्य सभी पारस्परिक टैरिफ” सहित कई श्रेणियों पर लागू किया गया है। यह वृद्धि हाल के वर्षों में किसी प्रमुख अमेरिकी सहयोगी पर लगाए गए सबसे बड़े शुल्कों में से एक है और यह अमेरिका की व्यापार समझौतों को लागू करने की सख्त नीति को दर्शाता है।
अमेरिका-दक्षिण कोरिया व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
वाशिंगटन और सियोल ने अक्टूबर 2025 में एक $350 बिलियन का व्यापार समझौता किया था। इस समझौते के अंतर्गत दक्षिण कोरिया को अमेरिका में भारी निवेश करना था, जिसमें जहाज निर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए विशेष राशि निर्धारित की गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप का आरोप है कि अमेरिका ने अपने शुल्कों में तेजी से कटौती की, जबकि दक्षिण कोरियाई संसद ने अब तक अपनी प्रतिबद्धताओं को मंजूरी नहीं दी है।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि उन्हें इस टैरिफ वृद्धि की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के कार्यालय ने बताया कि व्यापार मंत्री किम जंग-क्वान, जो वर्तमान में कनाडा में हैं, वॉशिंगटन जाकर अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से आपातकालीन वार्ता करेंगे। सियोल का कहना है कि यह समझौता एक ज्ञापन (MoU) है, न कि एक कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि, और इसलिए इसे संसदीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अमेरिका-दक्षिण कोरिया व्यापार समझौता अक्टूबर 2025 में $350 बिलियन मूल्य का घोषित किया गया था।
- कोरियाई निर्यात श्रेणियों पर टैरिफ 15% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया है।
- कई व्यापार समझौते विधिक संधियों के बजाय समझौता ज्ञापन (MoU) के रूप में होते हैं।
- टैरिफ आर्थिक कूटनीति और व्यापार नीति के प्रमुख उपकरण होते हैं।
ट्रंप के टैरिफ अधिकारों पर कानूनी बहस
इस बीच, अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों के उपयोग पर कानूनी चुनौती पर निर्णय को स्थगित कर दिया है। आयातकों का तर्क है कि राष्ट्रपति ने बिना कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के देश-विशिष्ट टैरिफ लागू कर अपनी सीमाओं से अधिक कार्य किया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की कोई तिथि नहीं दी है, जिससे अमेरिका की वर्तमान व्यापार नीतियों की कानूनी वैधता पर अनिश्चितता बनी हुई है।
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में एक नई जटिलता जोड़ दी है और आने वाले समय में अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ व्यापारिक संबंधों पर इसका प्रभाव गहरा हो सकता है।