अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बीच नया व्यापार और सुरक्षा समझौता
अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने एक व्यापक व्यापार और सुरक्षा समझौते पर सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य टैरिफ़ दबाव को कम करना और रणनीतिक सहयोग को मजबूत बनाना है। महीनों चली वार्ताओं के बाद यह समझौता आर्थिक अनिश्चितता को कम करने और दोनों देशों के बीच तकनीकी तथा रक्षा साझेदारी को गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
व्यापार स्थिरीकरण और टैरिफ़ में कमी
इस समझौते का सबसे अहम पहलू अमेरिकी आयात शुल्क में कमी है। अब दक्षिण कोरियाई उत्पादों पर लगने वाला शुल्क 25% से घटाकर 15% कर दिया गया है। यह कदम द्विपक्षीय व्यापार को स्थिर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा, अगर निवेश की स्थिति से बाज़ार में अस्थिरता पैदा होती है, तो दक्षिण कोरिया भुगतान अनुसूची में बदलाव की मांग कर सकेगा। यह लचीलापन दोनों देशों के बीच वित्तीय सहयोग को और मज़बूत बनाएगा।
रक्षा सहयोग का नया अध्याय
समझौते के तहत दक्षिण कोरिया परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेगा। इन पनडुब्बियों का निर्माण दक्षिण कोरिया द्वारा किया जाएगा, और कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह उत्पादन अमेरिकी भूमि पर स्थित कोरियाई स्वामित्व वाली सुविधाओं में भी हो सकता है। यह पहल अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सहयोग माना जा रहा है, जो दोनों की सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा।
निवेश और रणनीतिक उद्योगों में भागीदारी
दक्षिण कोरिया ने अमेरिका में 350 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है, जिसमें 200 अरब नकद और 150 अरब डॉलर जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए होंगे। इसके साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु ऊर्जा और उन्नत जहाज निर्माण तकनीकों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह निवेश पैकेज पहले की उन वार्ताओं से जुड़ा है, जिनमें दक्षिण कोरिया ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की बड़ी मात्रा में खरीदारी की प्रतिबद्धता जताई थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अमेरिका ने दक्षिण कोरियाई वस्तुओं पर टैरिफ़ 25% से घटाकर 15% कर दिया।
- दक्षिण कोरिया अमेरिका में 350 अरब डॉलर का निवेश करेगा।
- समझौते में परमाणु पनडुब्बियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जहाज निर्माण पर साझेदारी शामिल है।
- बाज़ार अस्थिर होने पर भुगतान शर्तों में लचीलापन देने की व्यवस्था की गई है।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इस समझौते को आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के रूप में सराहा, जबकि वाशिंगटन ने इसे रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं और रक्षा तैयारी को सशक्त करने वाला कदम बताया। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी उच्च मूल्य वाले उद्योगों और रक्षा तकनीकों में दोनों देशों को एक-दूसरे के और करीब लाएगी।