अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’: चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत $12 अरब की खनिज सुरक्षा योजना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में $12 अरब डॉलर के “प्रोजेक्ट वॉल्ट” की घोषणा की, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) का एक रणनीतिक भंडार तैयार करना है। यह पहल अमेरिका की रक्षा, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
क्या है प्रोजेक्ट वॉल्ट?
प्रोजेक्ट वॉल्ट एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी आधारित कार्यक्रम है, जिसके तहत कोबाल्ट, गैलियम और अन्य दुर्लभ खनिजों की खरीद कर उनका भंडारण किया जाएगा। इन खनिजों का उपयोग बैटरियों, सेमीकंडक्टर्स, रक्षा उपकरणों और जेट इंजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में होता है। इस परियोजना में $1.67 अरब की निजी पूंजी और US Export-Import Bank द्वारा $10 अरब तक की सरकारी गारंटी शामिल होगी।
खनिज भंडारण प्रणाली कैसे काम करेगी?
इस प्रणाली के अंतर्गत भागीदार कंपनियाँ पहले से तय कीमत पर खनिज खरीदने के लिए प्रतिबद्ध होंगी और पूर्व भुगतान शुल्क जमा करेंगी। इसके आधार पर प्रोजेक्ट वॉल्ट आवश्यक खनिज खरीदेगा और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर संग्रहित करेगा।
कंपनियाँ उस भंडार से आवश्यकता अनुसार खनिज निकाल सकती हैं, बशर्ते वे निकाले गए खनिजों को बाद में उसी मूल्य पर पुनः जमा करें। इस प्रणाली से कीमतों की अस्थिरता को नियंत्रित करना और आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में स्थायित्व बनाए रखना संभव होगा।
उद्योग भागीदारी और रणनीतिक महत्व
जनरल मोटर्स, बोइंग, स्टेलांटिस, गूगल और कॉर्निंग जैसी दर्जनों बड़ी कंपनियाँ इस परियोजना में शामिल हो चुकी हैं। वहीं Hartree Partners, Traxys North America और Mercuria Energy Group जैसी वैश्विक कमोडिटी कंपनियाँ कच्चे माल की खरीददारी संभालेंगी। लक्षित खनिजों का उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में होता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Critical Minerals में कोबाल्ट, लिथियम, गैलियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं।
- चीन इन खनिजों के वैश्विक प्रसंस्करण और आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है।
- Project Vault, US Strategic Petroleum Reserve की तर्ज पर तैयार किया गया है।
- खनिज सुरक्षा सीधे-सीधे रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी से जुड़ी होती है।
अभी क्यों कर रहा है अमेरिका यह पहल?
हाल के वर्षों में चीन ने कई खनिजों पर निर्यात नियंत्रण कड़ा किया है, जिससे अमेरिका की उत्पादन श्रृंखलाओं में बाधाएँ उत्पन्न हुई हैं। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने न केवल घरेलू खनन और प्रसंस्करण में निवेश बढ़ाया है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, जापान और मलेशिया जैसे देशों के साथ सहयोग समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
वॉशिंगटन में प्रस्तावित एक वैश्विक सम्मेलन के माध्यम से अमेरिका इन साझेदारियों को और गहरा करने की योजना बना रहा है। यह इस बात का संकेत है कि खनिज संसाधन अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक प्राथमिकता भी बन चुके हैं।
‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ अमेरिका की सप्लाई चेन स्वतंत्रता और रणनीतिक खनिज आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक खनिज सुरक्षा रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकती है।