अमेरिका का पहला माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टर एयरलिफ्ट: ऊर्जा और सुरक्षा में नया कदम
संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहली बार एक माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टर को सैन्य मालवाहक विमान के जरिए वायु परिवहन कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ऊर्जा विभाग और रक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से कैलिफोर्निया स्थित वैलर एटॉमिक्स द्वारा विकसित ‘वार्ड’ माइक्रोरिएक्टर को कैलिफोर्निया से यूटा के हिल एयर फोर्स बेस तक सी-17 सैन्य विमान से पहुंचाया। यह रिएक्टर बिना परमाणु ईंधन के भेजा गया था। इस कदम को उन्नत परमाणु ऊर्जा के त्वरित उपयोग और सामरिक तैनाती की दिशा में एक बड़ी प्रगति माना जा रहा है।
छोटे परमाणु रिएक्टरों पर रणनीतिक जोर
अमेरिकी प्रशासन छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों को घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अहम मानता है। बढ़ती ऊर्जा मांग, रक्षा अवसंरचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए परमाणु तैनाती को तेज करने के लिए नीतिगत पहलें की गई हैं। ऊर्जा विभाग ने माइक्रोरिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु अनुदान भी प्रदान किए हैं।
अधिकारियों के अनुसार यह एयरलिफ्ट इस बात का प्रमाण है कि कॉम्पैक्ट परमाणु रिएक्टरों को दूरस्थ या रणनीतिक स्थानों पर तेजी से तैनात किया जा सकता है। इससे आपातकालीन स्थितियों या सैन्य अभियानों में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की क्षमता मजबूत होगी।
वार्ड माइक्रोरिएक्टर की क्षमता
वार्ड माइक्रोरिएक्टर आकार में एक मिनीवैन से थोड़ा बड़ा है और इसे अधिकतम पांच मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए डिजाइन किया गया है। पूर्ण क्षमता पर यह लगभग 5,000 घरों को बिजली देने में सक्षम है। इसकी शुरुआत जुलाई में 100 किलोवाट उत्पादन से होने वाली है, जिसे इस वर्ष क्रमशः 250 किलोवाट तक बढ़ाया जाएगा और आगे चलकर पूर्ण क्षमता तक पहुंचाया जाएगा।
कंपनी की योजना 2027 तक सीमित वाणिज्यिक बिजली बिक्री शुरू करने और 2028 तक पूर्ण व्यावसायीकरण प्राप्त करने की है। रिएक्टर का परमाणु ईंधन नेवादा नेशनल सिक्योरिटी साइट से अलग से यूटा के एक निर्दिष्ट केंद्र तक पहुंचाया जाएगा।
लागत और अपशिष्ट प्रबंधन पर बहस
समर्थकों का तर्क है कि माइक्रोरिएक्टर दूरदराज क्षेत्रों में डीजल जनरेटर का विकल्प बन सकते हैं, जिससे ईंधन आपूर्ति शृंखला पर निर्भरता घटेगी। हालांकि आलोचक इसकी आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोरिएक्टर से उत्पादित बिजली की लागत पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों या पवन और सौर जैसे नवीकरणीय स्रोतों की तुलना में अधिक हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, परमाणु कचरे के दीर्घकालिक निपटान की समस्या अब भी पूरी तरह हल नहीं हुई है। छोटे रिएक्टर भी रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं, जिसके सुरक्षित प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक रणनीति आवश्यक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* माइक्रोरिएक्टर उन्नत परमाणु प्रणाली हैं, जो सामान्यतः 10 मेगावाट तक बिजली उत्पादन कर सकते हैं।
* ‘क्रिटिकलिटी’ का अर्थ है आत्मनिर्भर परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया की अवस्था।
* हिल एयर फोर्स बेस अमेरिका के यूटा राज्य में स्थित है।
* नेवादा नेशनल सिक्योरिटी साइट अमेरिका के परमाणु अनुसंधान और परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
माइक्रोरिएक्टर तकनीक ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है, लेकिन इसकी सफलता केवल तकनीकी दक्षता पर निर्भर नहीं करेगी। नियामकीय स्वीकृतियां, लागत प्रतिस्पर्धा, पर्यावरणीय चिंताएं और जनस्वीकृति जैसे कारक भी इसकी व्यापक स्वीकार्यता तय करेंगे। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि छोटे परमाणु रिएक्टर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में कितनी बड़ी भूमिका निभा पाते हैं।