अमेरिका का ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में नई रणनीति

अमेरिका का ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में नई रणनीति

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव की घोषणा की है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार हाल के कई दिनों की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की वायु रक्षा प्रणाली काफी कमजोर हो गई है। इसी कारण अब अमेरिकी सेना 500, 1,000 और 2,000 पाउंड वजन वाले सटीक मार्गदर्शित ग्रेविटी बमों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। यह कदम दर्शाता है कि अमेरिका अब लंबी दूरी से दागे जाने वाले हथियारों से आगे बढ़कर सीधे हवाई हमलों की रणनीति अपना रहा है।

स्टैंड-ऑफ हथियारों पर पहले निर्भरता

अब तक अमेरिकी सेना मुख्य रूप से स्टैंड-ऑफ हथियारों का उपयोग कर रही थी। इन हथियारों को दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली की सीमा से बाहर रहते हुए दागा जा सकता है, जिससे पायलटों के लिए जोखिम कम हो जाता है।

ऐसे हमलों में नौसेना के युद्धपोतों, स्टेल्थ विमानों और ड्रोन से दागे जाने वाले क्रूज़ मिसाइलों और मानव रहित युद्ध प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के रडार सिस्टम और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों को नष्ट करना था ताकि आगे के हवाई हमलों के लिए रास्ता साफ किया जा सके।

ग्रेविटी बम क्या होते हैं

ग्रेविटी बम ऐसे हथियार होते हैं जिन्हें विमान से गिराया जाता है और जो गुरुत्वाकर्षण और वायुगतिकीय बलों के आधार पर लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। इनमें कोई इंजन या प्रोपल्शन सिस्टम नहीं होता।

हालांकि आधुनिक तकनीक के कारण इन बमों की सटीकता काफी बढ़ गई है। जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन किट लगाने के बाद ये साधारण बम जीपीएस आधारित मार्गदर्शन प्राप्त कर लेते हैं। इस प्रणाली में लगे नियंत्रण पंख और नेविगेशन तकनीक बम को तय किए गए लक्ष्य तक सटीक रूप से पहुंचाने में मदद करते हैं। ऐसे बमों का उपयोग पहले इराक, अफगानिस्तान और सीरिया जैसे संघर्षों में भी किया जा चुका है।

पारंपरिक और परमाणु ग्रेविटी बम

वर्तमान सैन्य अभियान में जिन बमों का उपयोग किया जा रहा है वे पारंपरिक हथियार हैं जिनमें सामान्य रासायनिक विस्फोटक भरे होते हैं। जीपीएस मार्गदर्शन प्रणाली के साथ इनकी लागत लगभग 25,000 से 30,000 अमेरिकी डॉलर के बीच होती है और इन्हें सैन्य कमांडर ऑपरेशन के दौरान प्रयोग करने की अनुमति दे सकते हैं।

इसके विपरीत अमेरिका के पास परमाणु ग्रेविटी बम भी मौजूद हैं, जैसे बी-61 और बी-83 श्रृंखला। इनकी विस्फोटक क्षमता बहुत अधिक होती है और इनका उपयोग केवल अमेरिकी राष्ट्रपति की विशेष अनुमति से ही किया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्रेविटी बम ऐसे हथियार होते हैं जो विमान से गिराए जाने के बाद गुरुत्वाकर्षण के सहारे लक्ष्य तक पहुंचते हैं।
  • जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन किट साधारण बमों को जीपीएस आधारित सटीक हथियार में बदल देती है।
  • मार्क 80 श्रृंखला अमेरिकी वायुसेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक ग्रेविटी बमों का प्रमुख परिवार है।
  • वायु वर्चस्व का अर्थ है ऐसी स्थिति जब किसी सैन्य शक्ति को हवाई क्षेत्र में लगभग बिना विरोध के नियंत्रण मिल जाता है।

अमेरिकी हथियार भंडार में मार्क 80 श्रृंखला के ग्रेविटी बम प्रमुख भूमिका निभाते हैं। 500 पाउंड का एमके-82 हल्के सैन्य वाहनों, रडार सिस्टम और खुले ठिकानों को नष्ट करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 1,000 पाउंड का एमके-83 मजबूत संरचनाओं और सैन्य कमांड सेंटर जैसे लक्ष्यों के लिए बनाया गया है, जबकि 2,000 पाउंड का एमके-84 भारी किलेबंद ठिकानों और भूमिगत सैन्य सुविधाओं को भेदने में सक्षम होता है। इन बमों को आधुनिक लड़ाकू विमानों और रणनीतिक बमवर्षकों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे सैन्य अभियानों की क्षमता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ जाती हैं।

Originally written on March 7, 2026 and last modified on March 7, 2026.

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