अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों से ईरान में बढ़ा तनाव
संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ समन्वित सैन्य हमले शुरू किए हैं, जिनका लक्ष्य देश के प्रमुख राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया है और तेहरान की ओर से जवाबी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या इन हमलों का अंतिम उद्देश्य ईरान में शासन परिवर्तन करना है।
‘ऑपरेशन लायन’स रोअर’ और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
इज़राइल ने अपने अभियान को “ऑपरेशन लायन’स रोअर” नाम दिया है, जबकि अमेरिका ने अपनी भूमिका को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” कहा है। हमलों में कथित रूप से अयातुल्ला खामेनेई के कार्यालय के आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ केरमानशाह, क़ुम, इस्फहान, तबरीज़, करज और केनारक नौसैनिक अड्डे जैसे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरानी मीडिया के अनुसार कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। खामेनेई के वर्तमान स्थान के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, हालांकि बताया गया कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कई वरिष्ठ कमांडर हमलों में मारे गए। जवाब में ईरान ने इज़राइल और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल हमले किए।
अमेरिका और इज़राइल के राजनीतिक संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कार्रवाई को संभावित खतरों को समाप्त करने और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने ईरान पर दशकों से शत्रुतापूर्ण नीति अपनाने, उग्रवादी समूहों का समर्थन करने और अमेरिकी तथा इज़राइली हितों के खिलाफ गतिविधियों का आरोप लगाया।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संयुक्त कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे ईरान के लोगों को “अपना भविष्य स्वयं तय करने” का अवसर मिल सकता है। दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ईरानी नागरिकों से अपनी सरकार को चुनौती देने का आह्वान किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि अभियान का उद्देश्य केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकता।
खामेनेई की केंद्रीय भूमिका
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में सत्ता में हैं और उन्होंने देश की रणनीतिक नीति को आकार दिया है। उनके नेतृत्व में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार किया, मिसाइल कार्यक्रम को मजबूत किया और अमेरिका तथा इज़राइल के प्रति कठोर रुख बनाए रखा।
उनकी विचारधारा ईरान की राजनीतिक और सुरक्षा संरचना के केंद्र में मानी जाती है। इसलिए अमेरिका और इज़राइल के कई नीति-निर्माताओं का मानना है कि यदि खामेनेई को सत्ता से हटाया जाता है तो इस्लामिक गणराज्य की संस्थागत संरचना कमजोर हो सकती है। हालांकि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था गहराई से स्थापित है, जिसमें धार्मिक नेतृत्व, सेना और सुरक्षा संस्थान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ईरान का सर्वोच्च नेता देश की सेना, न्यायपालिका और प्रमुख सरकारी संस्थानों पर अंतिम अधिकार रखता है।
- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की नियमित सेना से अलग एक शक्तिशाली सैन्य संगठन है।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य आधार यूरेनियम संवर्धन है, जिसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी करती है।
- पश्चिम एशिया में अमेरिका के कई प्रमुख सैन्य अड्डे बहरीन, कतर और अन्य देशों में स्थित हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई आगे बढ़ती है तो इससे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। यह भी निश्चित नहीं है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित होगी या आंतरिक संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह संघर्ष सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या व्यापक राजनीतिक टकराव का रूप लेता है।