अमृता विश्व विद्यालय और CSIR‑NIScPR के बीच शोध एवं नीति सहयोग समझौता

अमृता विश्व विद्यालय और CSIR‑NIScPR के बीच शोध एवं नीति सहयोग समझौता

भारतीय उच्च शिक्षा और अनुसंधान परिदृश्य में एक उल्लेखनीय कदम के तहत अमृता विश्व विद्यालय (Amrita Vishwa Vidyapeetham) तथा CSIR–राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR–NIScPR) के बीच एक व्यापक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए हैं। यह समझौता शोध, विज्ञान संचार तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति से जुड़े कार्यक्रमों में सहयोग को और गहरा करने के उद्देश्य से किया गया है। इस समझौते का औपचारिक उद्घाटन NITI आयोग के दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान हुआ, जो इस बात को रेखांकित करता है कि अब राज्य‑स्तरीय संस्थाओं में अनुसंधान और विकास को एक प्रमुख भूमिका दी जा रही है।

कार्यक्रम का मुख्य फोकस आवेदन‑उन्मुख एवं नीति‑केंद्रित अनुसंधान पर रहा। इस सहयोग से संयुक्त शोध कार्यक्रम, नीति अध्ययन, क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक ज्ञान के व्यापक प्रसार को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल न केवल शैक्षणिक शोध को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जोड़ने में सहायक होगी, बल्कि शोध के परिणामों को लोगों तक प्रत्यक्ष लाभ के रूप में पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

शोध एवं नीति निर्माण में सहयोग

MoU के तहत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके मुख्य घटक इस प्रकार हैं:

• संयुक्त शोध एवं नीति‑अनुसंधान कार्यक्रमों का विकास तथा क्रियान्वयन।
• शोध क्षमताओं का निर्माण और वैज्ञानिक संचार के सर्वोत्तम अभ्यासों का प्रसार।
• प्रमाण‑आधारित नीति निर्धारण को सुदृढ़ करने के लिये साक्ष्य आधारित अध्ययन एवं विश्लेषण।
• शोध成果 के सामाजिक तथा आर्थिक उपयोगिता की दिशा में प्रयासों को बढ़ावा।

इस सहयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शोध गतिविधियाँ केवल अकादमिक सीमाओं तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में सक्षम बनें तथा नीति निर्माण में सार्थक योगदान दें।

NITI आयोग की सोच: तकनीक से सामाजिक प्रभाव

कार्यशाला के दौरान, NITI आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अमृता विश्व विद्यालय में किया जा रहा शोध आदर्श नागरिकों के वास्तविक जीवन की समस्याओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को उद्धृत करते हुए कहा कि “बहुत सी सामाजिक समस्याएं अगर उद्देश्यपूर्ण रूप से तकनीक के अनुप्रयोग के माध्यम से हल की जाएं तो बड़े स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं।” इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए शोध के परिणामों का राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जन‑कल्याण से जोड़ने पर जोर दिया गया।

बेरी ने यह भी कहा कि राज्य‑स्तरीय नवाचार संरचनाओं को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि संस्थागत क्षमता निर्माण के साथ‑साथ शोध संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और सरकारों के बीच सहयोग और भी प्रभावी रूप से कार्य कर सके।

“स्थिर नवाचार: राज्य संस्थाओं में R&D” कार्यशाला

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “Sustaining Innovation: Embedding R&D in State Institutions” के शीर्षक से आयोजित की गई थी, जिसमें नीति निर्माता, वैज्ञानिक तथा शैक्षिक और अनुसंधान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य चर्चा का विषय था:

• राज्य‑स्तरीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास।
• संस्थागत संरचना एवं क्षमता को सुदृढ़ करना।
• विश्वविद्यालय, शोध संगठन तथा सरकारी निकायों के बीच सहयोग की रूपरेखा।

कार्यशाला ने यह स्पष्ट किया कि अब केवल केंद्रीय नीतियों तक सीमित न रहकर राज्य सरकारें भी अनुसंधान और नवाचार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

CSIR–NIScPR विज्ञान संचार, वैज्ञानिक मीट्रिक्स एवं नीति अनुसंधान पर केंद्रित एक प्रमुख संगठन है।
NITI आयोग भारत की शीर्ष सार्वजनिक नीति संस्थान है, जिसने 2015 में योजना आयोग की जगह ली।
तमिलनाडु भारत में वार्षिक पेटेंट आवेदन में अग्रणी राज्य है।
• विश्वविद्यालय‑सरकार के अनुसंधान सहयोग को भारत की नवप्रवर्तन रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

तमिलनाडु में नवाचार और पेटेंट

कार्यशाला का आयोजन अमृता विश्व विद्यालय तथा तमिलनाडु राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से किया गया। परिषद के सदस्य सचिव प्रो. डॉ. एस. विंसेंट ने बताया कि तमिलनाडु प्रतिवर्ष लगभग 5,000 से 6,000 पेटेंट आवेदन दायर करता है, जिससे यह राष्ट्रीय स्तर पर सबसे आगे है। उन्होंने अमृता की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकारा और राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा विकसित भू‑संकेत (Geographical Indication) उत्पादों के लिये समर्थन की पुष्टि की।

इस प्रकार, यह सहयोग न केवल शैक्षणिक और नीति‑निर्माण परिदृश्य को सुदृढ़ करेगा, बल्कि अनुसंधान के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को भी व्यापक रूप से बढ़ावा देगा, जिससे देश के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

Originally written on January 12, 2026 and last modified on January 12, 2026.

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