अबू धाबी में पहली बार जीन थेरेपी से इलाज: आनुवांशिक रक्त विकारों के लिए CASGEVY तकनीक का प्रयोग
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी ने 5 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। यहाँ पहली बार आनुवांशिक रक्त विकारों के इलाज के लिए जीन थेरेपी इंजेक्शन CASGEVY का उपयोग किया गया। यह थेरेपी CRISPR-Cas9 जीन-संपादन तकनीक पर आधारित है, जो डीएनए स्तर पर रोग के मूल कारण को ठीक करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
CASGEVY: सहायक उपचार से आनुवंशिक सुधार की ओर
दशकों से सिकल सेल रोग और बीटा थैलेसीमिया जैसे आनुवांशिक रक्त विकारों का इलाज केवल सहायक पद्धतियों जैसे बार-बार रक्त आधान, आयरन चिलेशन और दर्द नियंत्रण के माध्यम से किया जाता रहा है। लेकिन CASGEVY थेरेपी इन रोगों की जड़ पर प्रहार करती है और डीएनए में मौजूद गड़बड़ियों को सही करती है। इससे न केवल मरीजों को अस्पतालों के चक्कर कम लगेंगे, बल्कि दीर्घकालिक जीवन गुणवत्ता में भी सुधार की संभावना है।
जीन थेरेपी की प्रक्रिया कैसे काम करती है
इस उपचार पद्धति में रोगी की अपनी ही स्टेम कोशिकाएं (Autologous stem cells) ली जाती हैं और नियंत्रित लैब में CRISPR-Cas9 तकनीक द्वारा उनमें जीन-संपादन किया जाता है। यह तकनीक डीएनए के दोषपूर्ण हिस्सों को सटीकता से काटकर उन्हें संशोधित करती है। इसके बाद संशोधित कोशिकाओं को रोगी के शरीर में वापस प्रविष्ट कराया जाता है, जहां ये अस्थि मज्जा में जाकर स्वस्थ रक्त कोशिकाएं उत्पन्न करती हैं।
चूंकि ये कोशिकाएं स्वयं रोगी से ली जाती हैं, इसलिए अस्वीकृति (Rejection) का खतरा भी कम होता है। हालांकि, इसके लिए उच्च स्तरीय लैब और विशेषज्ञ देखरेख की आवश्यकता होती है।
लक्षित रोग और क्षेत्रीय स्वास्थ्य पर प्रभाव
CASGEVY का पहला उपयोग बीटा थैलेसीमिया और सिकल सेल रोग जैसे उच्च नैदानिक बोझ वाले रोगों पर केंद्रित रहा। यह पहल न केवल इन रोगों में नया उपचार विकल्प प्रदान करती है, बल्कि हेमोफीलिया और स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी जैसी अन्य आनुवांशिक बीमारियों के लिए भी आशा की किरण है।
अबू धाबी की जीवन विज्ञान क्षेत्र में भारी निवेश और ‘एमीराती जीनोम प्रोग्राम’ जैसे उपक्रमों ने इस प्रकार की उन्नत चिकित्सा तकनीकों के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CRISPR-Cas9 एक जीन-संपादन तकनीक है जो डीएनए के विशिष्ट हिस्सों को संशोधित करने के लिए उपयोग होती है।
- सिकल सेल रोग में लाल रक्त कोशिकाएं “C” आकार की हो जाती हैं, जो रक्त प्रवाह को रोककर तीव्र दर्द उत्पन्न करती हैं।
- बीटा थैलेसीमिया एक आनुवंशिक विकार है जिसमें हीमोग्लोबिन उत्पादन कम हो जाता है और गंभीर एनीमिया होता है।
- जीन थेरेपी में आमतौर पर रोगी की अपनी स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है ताकि प्रतिरक्षा अस्वीकृति से बचा जा सके।
चरणबद्ध विस्तार और पहुंच
अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग ने इस तकनीक को पहले चरण में केवल चुनिंदा विशेषज्ञ केंद्रों तक सीमित रखा है, जहां विशेष प्रयोगशालाएं और रक्त विकारों में विशेषज्ञ टीम उपलब्ध हैं। अगले 6 से 12 महीनों में इस कार्यक्रम को अन्य प्रमाणित अस्पतालों तक फैलाने की योजना है।
हालांकि, लागत, दीर्घकालिक फॉलोअप और समान पहुंच सुनिश्चित करना इस तकनीक के व्यापक रूप से उपलब्ध होने की दिशा में प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे। फिर भी, यह पहल अरब क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक मील का पत्थर है।