अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन 2026: चुनौतियाँ, युवा असंतोष और सुधार की आवश्यकता
इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में आयोजित 39वां अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब महाद्वीप राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव जैसी बहुआयामी चुनौतियों का सामना कर रहा है। 1.4 अरब की आबादी वाला अफ्रीका विश्व की सबसे युवा जनसंख्या का घर है, लेकिन नेतृत्व के स्तर पर लंबे समय से सत्ता में बने नेताओं की उपस्थिति ने एक स्पष्ट पीढ़ीगत अंतर पैदा कर दिया है। ऐसे परिदृश्य में यह शिखर सम्मेलन महाद्वीप के भविष्य की दिशा तय करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवा असंतोष और नेतृत्व पर सवाल
अफ्रीका में 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 40 करोड़ से अधिक युवा हैं। यह संख्या आने वाले दशकों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसके विपरीत कई देशों में दशकों से सत्ता में बने नेता लोकतांत्रिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के प्रश्नों को जन्म देते हैं। युवाओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि अफ्रीकी संघ आम नागरिकों की अपेक्षाओं की तुलना में सरकारों के हितों को अधिक प्राथमिकता देता रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अक्सर इसे बुजुर्ग नेताओं का मंच कहकर आलोचना की जाती है। बेरोजगारी, गरीबी और जीवन स्तर में गिरावट ने युवाओं की निराशा को और गहरा किया है। वर्ष 2050 तक अफ्रीका की युवा आबादी दोगुनी होने की आशंका है, जिससे रोजगार सृजन और समावेशी विकास की चुनौतियाँ और गंभीर होंगी। यदि इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सामाजिक असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
चुनावी विवाद और प्रवर्तन की कमजोरियाँ
हाल के वर्षों में कई अफ्रीकी देशों में हुए चुनावों ने संघ की निगरानी प्रणाली की सीमाओं को उजागर किया है। विपक्षी उम्मीदवारों को हाशिये पर डालने, इंटरनेट बंद करने और आलोचकों को परेशान करने जैसे आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। कई स्थानों पर युवा मतदाताओं ने विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अफ्रीकी संघ के प्रस्तावों और निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी एक स्थायी समस्या रही है। सदस्य देशों द्वारा वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा न करना और नीतिगत प्रतिबद्धताओं का पूर्ण पालन न करना भी संगठन की प्रभावशीलता को प्रभावित करता है। इससे संघ की विश्वसनीयता और जनस्वीकृति दोनों पर असर पड़ता है।
शिखर सम्मेलन का एजेंडा और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय जल और स्वच्छता है, साथ ही जलवायु परिवर्तन और मानवीय संकटों पर भी चर्चा की जा रही है। विदेशी सहायता में कमी और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच अफ्रीका को अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की आवश्यकता है।
सूडान, साहेल क्षेत्र, पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और सोमालिया जैसे क्षेत्रों में जारी अस्थिरता ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। साथ ही, वैश्विक संघर्षों पर अफ्रीकी संघ की कूटनीतिक भूमिका भी चर्चा में है। यह स्पष्ट है कि बदलती विश्व व्यवस्था में अफ्रीका अपनी सामूहिक आवाज को प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
अफ्रीकी संघ की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी।
इसका मुख्यालय इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में स्थित है।
यह 55 सदस्य देशों का संगठन है जो राजनीतिक और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है।
अफ्रीका विश्व का सबसे कम औसत आयु वाला महाद्वीप है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
अफ्रीकी संघ ने संगठनात्मक रूप से अफ्रीकी एकता संगठन का स्थान लिया था।
संघ का उद्देश्य शांति, सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
अफ्रीका में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती जनसंख्या पाई जाती है।
संघ विभिन्न शांति मिशनों के माध्यम से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में हस्तक्षेप करता रहा है।
अंततः, अफ्रीकी संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी वैधता और प्रासंगिकता को पुनर्स्थापित करना है। लोकतांत्रिक जवाबदेही, पारदर्शिता और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दिए बिना यह संभव नहीं होगा। यदि संगठन महाद्वीप की युवा ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ने में सफल रहता है, तो वह न केवल अफ्रीका बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।