अनमिश वर्मा ने बनाया सेवन वोल्केनिक समिट्स चढ़ने का विश्व रिकॉर्ड
भारतीय पर्वतारोही भूपतिराजु अनमिश वर्मा ने वैश्विक पर्वतारोहण जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए सेवन वोल्केनिक समिट्स को सबसे कम समय में फतह करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इस चुनौती को मात्र 92 दिन, 4 घंटे और 45 मिनट में पूरा किया, जिसे फरवरी 2026 में आधिकारिक मान्यता भी मिली। यह उपलब्धि उनके अदम्य साहस, धैर्य और उत्कृष्ट शारीरिक क्षमता का प्रतीक है।
सेवन वोल्केनिक समिट्स क्या हैं?
सेवन वोल्केनिक समिट्स दुनिया के सातों महाद्वीपों के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वतों का समूह है। यह चुनौती अत्यंत कठिन मानी जाती है क्योंकि इसमें अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियां, कठोर मौसम और जटिल मार्ग शामिल होते हैं। इन पर्वतों में रूस का माउंट एल्ब्रस, ईरान का माउंट दमावंद, मैक्सिको का पिको डी ओरिजाबा, चिली-अर्जेंटीना का ओजोस डेल सालाडो, पापुआ न्यू गिनी क्षेत्र का माउंट गिलुवे, तंजानिया का माउंट किलिमंजारो और अंटार्कटिका का माउंट सिडली शामिल हैं।
अभियान की यात्रा और समयसीमा
अनमिश वर्मा ने अपनी यात्रा 23 अक्टूबर 2024 को रूस के माउंट एल्ब्रस से शुरू की। इसके बाद उन्होंने लगातार तीन महीनों तक विभिन्न महाद्वीपों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए पर्वतारोहण जारी रखा। अंततः उन्होंने 23 जनवरी 2025 को अंटार्कटिका के माउंट सिडली पर चढ़ाई पूरी कर इस चुनौती को सफलतापूर्वक समाप्त किया। यह यात्रा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा थी।
उपलब्धि का महत्व
यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का विषय है और यह दर्शाती है कि भारतीय पर्वतारोही अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इतने कम समय में इस चुनौती को पूरा करना उच्च स्तर की योजना, अनुकूलन क्षमता और दृढ़ संकल्प की मांग करता है। यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि देश के साहसिक खेलों के बढ़ते स्तर को भी दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेवन वोल्केनिक समिट्स सातों महाद्वीपों के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर्वत हैं।
- माउंट सिडली अंटार्कटिका का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी है।
- माउंट एल्ब्रस रूस में कॉकसस पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है।
- ओजोस डेल सालाडो दुनिया का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी है।
यह रिकॉर्ड 27 फरवरी 2026 को आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हुआ, जो अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अनमिश वर्मा की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और भारत में साहसिक खेलों के प्रति रुचि को बढ़ावा देगी। यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।