“अग्नि परीक्षा”: अरुणाचल में भारतीय सेना और ITBP का साझा युद्धाभ्यास
भारतीय सेना और इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने अरुणाचल प्रदेश के सिगार (जिला: ईस्ट सियांग) में एक छह दिवसीय संयुक्त युद्धाभ्यास का आयोजन किया। “अग्नि परीक्षा” नामक यह अभ्यास 19 से 24 जनवरी 2026 तक चला और इसका उद्देश्य दोनों बलों के बीच संचालनात्मक समन्वय और युद्धक्षमता को बढ़ाना था। यह कदम संयुक्त संचालन सिद्धांत को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
युद्धाभ्यास के उद्देश्य
“अग्नि परीक्षा” का मुख्य उद्देश्य था गैर-तोपखाना कर्मियों को तोपखाना प्रक्रियाओं, समन्वय तंत्र और फायरिंग मिशन के निष्पादन से परिचित कराना। अभ्यास ने परंपरागत भूमिका-आधारित सीमाओं को तोड़ते हुए, इन्फेंट्री और ITBP जवानों को वास्तविक युद्ध परिदृश्य में तोपखाने के उपयोग से अवगत कराया।
प्रथम संयुक्त फायरपावर प्रशिक्षण: एक ऐतिहासिक पहल
इस अभ्यास में Spear Corps के तोपखाना गनर्स, इन्फेंट्री रेजीमेंट्स और ITBP इकाइयों के साथ मिलकर प्रशिक्षण में शामिल हुए। यह पहली बार था जब भारतीय सेना के तोपखाना घटक और ITBP कर्मियों के बीच साझा फायरपावर प्रशिक्षण किया गया।
गैर-तोपखाना सैनिकों को स्वतंत्र रूप से तोपखाना फायरिंग अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया गया, जो अनुभवी गनर्स की देखरेख में संचालित किया गया।
संचालनात्मक लाभ और युद्ध तत्परता
इस अभ्यास से निम्नलिखित संचालनात्मक लाभ प्राप्त हुए:
- तोपखाना योजना और निष्पादन की समझ में सुधार
- बलों के बीच आपसी विश्वास और समन्वय को बढ़ावा
- फायरपावर एकीकरण की व्यावहारिक समझ, जिससे युद्ध के दौरान तेज निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है
सीमावर्ती और उच्च तीव्रता वाले संघर्षों के संदर्भ में, यह समन्वय रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- “अग्नि परीक्षा” एक संयुक्त अभ्यास था जिसमें भारतीय सेना और ITBP ने भाग लिया।
- यह 19–24 जनवरी 2026 को सिगार, ईस्ट सियांग जिला, अरुणाचल प्रदेश में आयोजित हुआ।
- अभ्यास का उद्देश्य था गैर-तोपखाना सैनिकों को तोपखाना प्रक्रियाओं से परिचित कराना।
- यह संयुक्त संचालन क्षमता और एकीकृत युद्ध रणनीति को सशक्त करने की दिशा में पहल थी।
भविष्य की एकीकृत युद्ध रणनीति की ओर
“अग्नि परीक्षा” केवल पहला चरण है — यह भविष्य के जटिल ऑपरेशनल परिदृश्यों के लिए संयुक्त बल क्षमताओं के विकास की एक लंबी रणनीति का हिस्सा है। यह अभ्यास भारतीय सेना के “इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स” और अर्धसैनिक बलों के साथ संयुक्त संचालन की उभरती अवधारणा का भी परिचायक है।
यह पहल न केवल सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि भारत की आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ढलने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।