अगरतला में अल्बर्ट एक्का ब्रिगेड का 56वां स्थापना दिवस: 1971 युद्ध की वीरगाथा और बलिदान की स्मृति
भारतीय सेना की प्रतिष्ठित इकाई “अल्बर्ट एक्का ब्रिगेड” ने अपना 56वां स्थापना दिवस अगरतला सैन्य स्टेशन पर सादगीपूर्ण सैन्य परंपराओं के साथ मनाया। यह अवसर 1971 के भारत-पाक युद्ध में त्रिपुरा सेक्टर से ब्रिगेड की वीरतापूर्ण भूमिका, बलिदान और राष्ट्र सेवा की स्मृति में समर्पित था। यह ब्रिगेड आज भी भारतीय सेना के पराक्रम और समर्पण की प्रेरणास्पद मिसाल मानी जाती है।
श्रद्धांजलि समारोह और बलिदानियों को सम्मान
स्थापना दिवस की शुरुआत उन वीर सैनिकों की स्मृति में पुष्पांजलि समारोह से हुई जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी, अन्य सैनिक और नागरिक गणमान्य व्यक्तियों ने वीरगति को प्राप्त जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन ब्रिगेड की वीरता और गौरवपूर्ण परंपरा के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
1971 युद्ध और शौर्य की विरासत
अल्बर्ट एक्का ब्रिगेड को युद्धकाल और शांतिकाल दोनों में सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्राप्त करने का अनूठा गौरव प्राप्त है। 1971 के युद्ध में इस ब्रिगेड ने ऑपरेशन कैक्टस लिली के अंतर्गत त्रिपुरा सीमा के पास “गंगासागर की लड़ाई” में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अगरतला सेक्टर विशेष रूप से ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यहीं से ब्रिगेड को युद्ध क्षेत्र में तैनात किया गया था।
लांस नायक अल्बर्ट एक्का का बलिदान
14 गार्ड्स के लांस नायक अल्बर्ट एक्का ने अगरतला को खतरे में डालने वाले एक दुश्मन बंकर को ध्वस्त करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया—जो भारत का सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने हेतु ब्रिगेड को उनके नाम से “अल्बर्ट एक्का ब्रिगेड” कहा जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अल्बर्ट एक्का ब्रिगेड ने 1971 भारत-पाक युद्ध में त्रिपुरा सेक्टर से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- ऑपरेशन कैक्टस लिली पूर्वी मोर्चे का एक प्रमुख सैन्य अभियान था।
- परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य वीरता सम्मान है।
- 1971 युद्ध के बाद स्वतंत्र बांग्लादेश का गठन हुआ था।
सैन्य कौशल और ऐतिहासिक महत्व
ब्रिगेड के स्थापना दिवस पर संबोधित करते हुए ब्रिगेडियर धीरेज सिंह ने ब्रिगेड के सैन्य कौशल, कार्यनिष्ठा और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। रक्षा विश्लेषक मानस पॉल ने बताया कि 1971 के युद्ध में ऑपरेशन कैक्टस लिली और ऑपरेशन नट क्रैकर जैसे अभियानों के तहत 57 माउंटेन डिवीजन ने महत्वपूर्ण अग्नि समर्थन प्रदान किया था। यह अभियान 16 दिसंबर 1971 को समाप्त हुआ, जब पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण किया—जो दक्षिण एशिया के इतिहास का निर्णायक क्षण बन गया।
अल्बर्ट एक्का ब्रिगेड का यह गौरवमयी इतिहास आज भी भारतीय सेना की प्रेरणा का स्तंभ है और राष्ट्र के प्रति उसकी सेवा भावना का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।