अंतरिक्ष में ईंधन भरने की दिशा में भारत का बड़ा कदम: PSLV-C62 से लॉन्च होगा Ayulsat, विश्व में दूसरा देश बनने की तैयारी
भारत एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष तकनीकी उपलब्धि की ओर तेजी से अग्रसर है। आगामी PSLV-C62 मिशन के तहत एक निजी उपग्रह Ayulsat को प्रक्षेपित किया जाएगा, जो अंतरिक्ष में इन-ऑर्बिट ईंधन स्थानांतरण (On-Orbit Refuelling) की तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में परखने वाला पहला भारतीय प्रयोग होगा। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो भारत दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा जिसने इस अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन किया है।
PSLV-C62 मिशन और Ayulsat का प्रक्षेपण
इस मिशन के अंतर्गत OrbitAid नामक निजी स्टार्टअप द्वारा विकसित 25 किलोग्राम वजनी Ayulsat उपग्रह को ISRO के भरोसेमंद PSLV रॉकेट से श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन भारत की उन्नत सैटेलाइट सर्विसिंग और स्पेस सस्टेनेबिलिटी क्षमताओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अंतरिक्ष में ईंधन भरना क्यों महत्वपूर्ण है?
इन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग तकनीक को गेम-चेंजर माना जाता है क्योंकि यह:
• उपग्रहों की आयु को कई वर्षों तक बढ़ा सकती है
• स्पेस डेब्रिस को कम कर सकती है
• भविष्य के मिशनों की लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकती है
अब तक केवल चीन ने इस तकनीक को सफलतापूर्वक प्रदर्शित करने का दावा किया है, हालांकि उसके तकनीकी विवरण सार्वजनिक रूप से सीमित हैं। अभी तक अमेरिका सहित अन्य कोई देश ने आधिकारिक तौर पर इस प्रकार का प्रदर्शन नहीं किया है।
OrbitAid की चरणबद्ध तकनीकी रणनीति
जबकि सामान्य इन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग में दो उपग्रहों का समन्वय होता है, OrbitAid का पहला प्रयोग एक ही उपग्रह के भीतर ईंधन स्थानांतरण पर केंद्रित है। Ayulsat को इस उद्देश्य के लिए डिज़ाइन किया गया है कि वह सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में ईंधन के व्यवहार का अध्ययन कर सके।
OrbitAid के अनुसार, यह प्रयोग लॉन्च के चार घंटे के भीतर किया जाएगा, जिससे वैज्ञानिकों को तत्काल और वास्तविक समय के डेटा प्राप्त होंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• On-Orbit Refuelling तकनीक उपग्रहों की आयु बढ़ाती है और लागत घटाती है।
• PSLV ISRO का सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यान है, विशेषतः Low Earth Orbit मिशनों के लिए।
• चीन अब तक इस तकनीक को प्रदर्शित करने वाला एकमात्र देश है।
• Microgravity में तरल पदार्थों का व्यवहार पृथ्वी से अत्यधिक भिन्न होता है।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए रणनीतिक महत्त्व
यदि Ayulsat का परीक्षण सफल होता है, तो यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष सेवाओं के बाजार में एक नई पहचान देगा। इसके साथ ही यह दर्शाता है कि निजी स्टार्टअप्स अब ISRO के साथ कदम से कदम मिलाकर अंतरिक्ष तकनीकों में नवाचार कर रहे हैं।
यह मिशन सैटेलाइट सर्विसिंग, मलबा प्रबंधन (Debris Mitigation) और व्यावसायिक अंतरिक्ष नेतृत्व के भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप है और देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।